खुशखबरी : कल से दुधवा नेशनल पार्क की यात्रा कर सकेंगे पर्यटक


उत्तर प्रदेश स्थित प्रख्यात दुधवा नेशनल पार्क कल से अगले सात महीनों तक पर्यटकों के स्वागत के लिए खुल जाएगा। नेशनल पार्क प्रति वर्ष 15 नवंबर को खुलता है और 15 जून को बंद हो जाता है। नए पर्यटन सत्र के बारे में दुधवा नेशनल पार्क के उप निदेशक महावीर कौजालगी ने बताया कि उद्यान में बने जंगल के रास्तों और छोटे पुलों की मरम्मत कर दी गई है ताकि पर्यटन वाहनों के आवागमन के कोई परेशानी ना हो।

पर्यटकों के ठहरने का बेहतर इंतजाम किया गया है। पर्यटकों के रूकने के लिए दुधवा में आधुनिक शैली में थारू हट उपलब्ध हैं। रेस्ट हाउस-प्राचीन इण्डो-ब्रिटिश शैली की इमारतें भी पर्यटकों के लिए उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि उद्यान के भीतर पर्यटन के लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था की गई है। जो पर्यटक अपने वाहन से उद्यान में घूमना चाहते हैं, उन्हें कड़ी सुरक्षा जांच से गुजरना होगा। जांच में सबकुछ ठीक मिलने पर ही उन्हें अंदर जाने की इजाजत दी जायेगी।

इसके अलावा पचास गाइड भी हैं जो पर्यटकों को विशेष दूरबीन की मदद से मनोरम प्राकृतिक दृश्यों के दर्शन करायेंगे। कौजालगी ने बताया कि उप्र सरकार ने इस साल कर्नाटक पार्क से 11 हाथी मंगवाए हैं। हमारे पास 14 हाथी पहले से हैं, इन नए हाथियों के आने से पर्यटकों को घूमने में और आनंद आयेगा। यह नए हाथी अगले कुछ सप्ताह में दुधवा नेशनल पार्क पहुंच जाएंगे।

उन्होंने बताया कि दुधवा नेशनल पार्क में द्विवार्षिक बाघ गणना की प्रारंभिक तैयारी पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी और करतनिया सैंक्चुअरी में कैमरे की मदद से प्रत्येक दो वर्ष में बाघों की गिनती की जाती है। इसके लिए दुधवा पार्क में विभिन्न स्थानों पर 450 कैमरे लगाये गए हैं।

उन्होंने कहा कि बाघों की गिनती का काम अगले कुछ दिनों में शुरू हो जायेगा और यह अगले दो महीने तक चलेगा। दुधवा नेशनल पार्क उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित है। लखीमपुर खीरी जनपद में स्थित यह संरक्षित क्षेत्र भारत और नेपाल की सीमाओं से लगे विशाल वन क्षेत्र में फैला है। 1977 में दुधवा के जंगलों को राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया। सन 1987-88 में किशनपुर वन्य जीव विहार को दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में शामिल कर लिया गया तथा इसे बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया गया।