वीर सैनिक हैं देश की शान


लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल शहीद स्मृति वाटिका में कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की प्रतिमाओं पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर काकोरी काण्ड व कारगिल युद्ध के शहीदों के परिवारीजनों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल राम नाईक ने कहा आज का दिन बड़ा पावन है। इस धरती पर अनेक वीर सपूतों ने जन्म लिया, जिन्होंने हमेशा ही देश को विदेशी आक्रान्ताओं से बचाने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। सैनिक हमारे देश की शान हैं। देश की एकता और अखण्डता की रक्षा करना वे अपना सबसे पुनीत कार्य समझते हैं। हम सभी के लिए ये वीर सैनिक प्रेरक हैं, इनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत माता के जिन सपूतों ने भारत की स्वाधीनता को अक्षुण्ण बनाए रखने में अपना बलिदान किया, उसे हमेशा याद रखा जाएगा। इन वीर जवानों के प्रति प्रत्येक नागरिक को अपनी कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सैनिकों का बलिदान राष्ट्र का जीवन होता है। 26 जुलाई, 1999 को पाकिस्तान की कायराना हरकत पर भारतीय सैनिकों ने अपनी विजय पताका पहरायी। भारत का इतिहास शौर्य और पराक्रम का इतिहास रहा है। हर कालखण्ड में यहां के सपूतों ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया है।

श्री योगी ने कहा कि देश की रक्षा करते हुए शहीद होने से बड़ा कोई बलिदान नहीं है। युद्धकाल के दौरान अदम्य साहस, वीरता और शौर्य का प्रदर्शन करने वाले सैनिकों को विभिन्न प्रकार के वीरता पदक दिए जाते हैं। लेकिन शांतिकाल के दौरान भी आतंकवादी घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं सहित कई ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, जिसमें सैनिक अपनी कर्मठता, शौर्य, पराक्रम तथा कर्तव्यपरायणता का परिचय देते हुए देश सेवा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा देते हैं।

उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम लखनऊ में डॉ0 शर्मा के मेयर बनने के दौरान लखनऊ नगर निगम द्वारा शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि देश-प्रेम से जुड़े इस प्रकार के कार्यक्रम राज्य के हर नगर निगम में होने चाहिए। विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्र भावना से जुड़ी विभिन्न पहलुओं की प्रेरक जानकारियां भी उपलब्ध करायी जानी चाहिए, जिससें नई पीढ़ी में राष्ट्र भक्ति की भावना प्रबल हो सके।

– असलम सिद्दीकी