भारत, पाक और बांग्लादेश की खुशहाली के लिए महासंघ बनना बेहद जरूरी


बाराबंकी: पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं वरिष्ठ सपा नेता शिवपाल सिंह यादव से लखनऊ स्थित आवास पर गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने मुलाकात की। इस दौरान आगामी 13 अगस्त को दिल्ली में आयोजित होने वाले भारत पाकिस्तान बांग्लादेश का महासंघ बनाओ सम्मेलन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इस मौके पर शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि तीनों देशों की तरक्की और खुशहाली के लिए महासंघ का बनना बेहद जरूरी है। आज जब सत्तारूढ़ दल स्व. दीन दयाल उपाध्याय की विचारधारा पर कार्य कर ही है। तो ऐसे में डा. लोहिया के विचारों को भी आत्मसात करने की जरूरत है। 12 अप्रैल 1964 को डा. राममनोहर लोहिया और दीन दयाल उपाध्याय ने भारत और पाकिस्तान के महासंघ पर संयुक्त बयान जारी किया। जिसकी प्रसांगिकता को समाजवादी साथी राजनाथ शर्मा ने आज भी आवाम के बीच जिन्दा रखा है।

श्री यादव ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक सदस्य स्व. दीन दयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी और समाजवादी पुरोधा डा. राममनोहर लोहिया की 50वीं पुण्य तिथि पर भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश का महासंघ बनाने का संयुक्त प्रयास किया जाना चाहिए। इस मौके पर श्री शर्मा ने बताया कि सन् 1965 से भारत पाकिस्तान के बीच महासंघ बनाने का प्रयास सम्मेलनों और आमजन सहमति के माध्यम से किया जा रहा है। महासंघ बनाओ मुहीम के पांच दशक पूरे होने पर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन का आयोजन दिल्ली में किया जा रहा है। जिसमें शामिल होने के लिए देश के सभी राजनैतिक पार्टियों के दिग्गज नेताओं के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश के राजनैतिक व्यक्तियों एवं पत्रकारों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।

श्री शर्मा ने कहा कि गैरकांग्रेसवाद की शुरूआत डा. लोहिया की ही देन है। जिसमे ंडा लोहिया का सहयोग पं दीनदयाल उपाध्याय, माधव प्रसाद त्रिपाठी, नानाजी देशमुख सरीखे नेताओं ने महासंघ की विचारधारा से प्रभावित होकर किया। जिसके बाद सन् 1967 के चुनाव में पहली गैरकांग्रेस सरकार बनी। जिसका परिणाम यह हुआ कि काफी समय से दिल्ली मे ंगैरकांग्रेसी सरकारें बन रही है। महासंघ का विचार महात्मा गांधी से प्रारम्भ होकर डा. लोहिया और दीनदयाल उपाध्याय के विचारों में समाहित होकर आम जनता में पहुंचा है। इसके लिए पाकिस्तान में जिया ए सिंध और बादशाह खान जैसे लोग पक्षधर थे। आज की दुनिया में शान्ति, अमन और तरक्की के लिए तीनो ंदेशो ंका महासंघ ही एकमात्र विकल्प है।

– मो. अतहर