कम पड़ गई 1500 बसें


गोवर्धन: मुड़िया पूर्णिमा मेला में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम द्वारा मेला के लिए लगाई गई 1500 बसों के साथ यात्रा कराने के दावे फेल नजर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं को जान जोखिम में रखकर आवागमन बसों की छत पर बैठकर करना पड़ रहा है। भीड़ की तादाद बढ़ते ही बसें कम पड़ गईं। मुड़िया मेला में परिवहन निगम ने सात डिपो की बसें बुलाई हैं। जिनका मेला में स्थिर किराये में बढ़ोत्तरी कर संचालन किया जा रहा है। मेला में अव्यवस्थाओं से बचने के लिए ज्यादातर श्रद्धालु अपने वाहनों को लेकर नहीं आते हैं। गोवर्धन पहुंचने के लिए रोडवेज की बसों का ही सहारा लेना पड़ता है। मथुरा मार्ग के वनवे होने के कारण दोबारा बसों को मथुरा के लिए बाया सौंख भेजा जा रहा है।

इसके बाद भी बसों का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। भीड़ के बढ़ते ही परिक्रमा के लिए आने व जाने वाले श्रद्धालुओं का रेला बसों में ठूस-ठूस कर भर जाता है। इसके बाद में भी सवारियां छतों पर चढ़ जाती है। ऐसे में बस की छतों पर यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। बस पर सवारियां किराया भी नहीं दे रही हैं। रोडवेज को फायदे के बजाय उल्टा नुकसाना होगा। राजस्थान को जोड़ने वाले डीग मार्ग पर भी सवारियां अधिक हैं और भरतपुर प्रशासन द्वारा चलाई जाने वाली बसें कम पड़ रही हैं। डीग मार्ग, बरसाना-कोसी मार्ग, छाता मार्ग, सौंख मार्ग आदि पर श्रद्धालुओं को डग्गेमार वाहनों से ही यात्रा करनी पड़ रही है।