प्राइमरी स्कूलों में अब इमला और पहाडा नहीं


लखनऊ : मंत्रियों की गाडी से लाल बत्ती उतरने को कोई चाहे जिस रूप मे ले लेकिन इससे सूबे की बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री( स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल बेहद खुश है क्योंकि इससे उन्हें प्राइमरी स्कूलों में केवल इमला और पहाडा पढाये जाने की संस्कृति को रोकने में मदद मिल रही है। श्रीमती जायसवाल ने आज यहां कहा कि उन्होंने कई स्कूलों का औचक निरीक्षण किया।

गाडी में लाल बत्ती लगी होने की वजह से शिक्षक जान जाते थे और एक कमरे में वे इमला बोलने लगते थे जबकि दूसरे कमरे में बच्चे पहाडा पढने लगते थे। उन्होंने 50 से अधिक स्कूलों का निरीक्षण किया लेकिन ज्यादातर स्कूलों में यही नजारा देखने को मिला। लाल बत्ती नहीं रहने के कारण अब अध्यापकों या अध्यापिकाओं को उनके आने का पता नहीं चल पाता। उन्होंने कहा कि अब केवल इमला या पहाडा की संस्कृति नहीं चलेगी।

जिन विद्यालयों में यह नजारा मिलता है उसमें सबसे पहले वह पूछती हैं कि यह समय किस विषय का है। जिस विषय का पीरियड हो वही पढाया जाना चाहिए। राज्य मंत्री ने स्वीकार किया कि बेसिक शिक्षा के हालात ठीक नहीं है। उनकी सरकार इसे दुरूस्त करने में लगी हुई है और इसके लिए जनसहभागिता बढाई जा रही है। प्राइमरी स्कूलों को गोद लिये जाने की व्यवस्था शुरू की गयी है। वह सांसदों, विधायकों, अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों से कम से कम एक स्कूल गोद लेने की लगातार अपील कर रही हैं।

श्रीमती जायसवाल ने बताया कि अपील का फायदा भी मिल रहा है। उनके विभाग के अपर मुख्य सचिव आर पी ङ्क्षसह ने सबसे खराब हालत में पहुंच चुके स्कूल को गोद लिया है। लोनी में एक खण्ड विकास अधिकारी ने स्कूल को गोद लेकर उसे चमका दिया है। कई विधायकों और सांसदों ने भी उनकी अपील को गंभीरता से लिया है। उनका कहना था कि वह सेल, गेल जैसी मुनाफे वाली कंपनियों से भी इस तरह का आग्रह कर रही है।

कई निजी संस्थायें उनकी अपील पर अमल करने के लिए आगे आ रही हैं। उन्हें भरोसा है कि इसका फायदा जल्द ही दिखने लगेगा। बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि जनसहभागिता बढाने के लिए मध्यान्ह भोजन की देखरेख के लिए स्कूल के बच्चों की माताओं को लगाया जा रहा है। एक स्कूल में कम से कम छह मातायें लगेंगी।

इस तरह डेढ लाख स्कूलों में नौ लाख माताओं की सहभागिता हो जायेगी। वे मध्यान्ह भोजन के साथ-साथ स्कूल की पढाई पर भी नजर रख सकेंगी। स्कूलों में अध्यापकों की समय पर आने के लिए सेल्फी व्यवस्था लागू की जा रही है जिसमें अध्यापक को आने-जाने और मध्यान्ह भोजन के समय सेल्फी लेना होगा। सेल्फी को अचानक चेक किया जा सकता है।

–  (वार्ता)