सपा ने सदन में बहिर्गमन किया


लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधान परिषद में प्रशनकाल में सरकार के एक सवाल पर रुख को लेकर सपा के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। प्रशनकाल खत्म होते ही सपा सदस्य बलराम यादव ने अपनी पार्टी के सदस्य नरेश चन्द उत्तम का सवाल उठाते हुए सदन में सरकार से वक्तव्य की मांग की। वह मुद्दा स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों के एक लाख 92 हजार 123 शिक्षकों के मानदेय से सम्बन्धित था, जिनके लिए पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार ने मानदेय की व्यवस्था की थी।

सदन में पूछा गया था कि स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों के वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिखित उत्तर में प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मंत्री उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई नीति या प्रावधान नहीं है। सपा सदस्यों द्वारा शून्यकाल में यह मुद्दा उठाये जाने पर शर्मा ने पीठ से मुखातिब होते हुए कहा कि प्रश्नकाल समाप्त हो गया है, लिहाजा शून्यकाल में प्रश्न उठाना नियम संगत नहीं है, इसलिये वह इसका जवाब देने के लिये बाध्य नहीं हैं।

ग्राम्य विकास राज्यमंत्री डाक्टर महेन्द्र सिंह ने भी नेता सदन दिनेश शर्मा का समर्थन करते हुए कहा कि अगर यह मुद्दा इतना ही गम्भीर था तो इसे अलग सूचना के रूप में सदन में रखा जाना चाहिये था। इस पर सपा के कई सदस्यों ने हाथ में प्रश्नोत्तरी उठाते हुए दलील दी कि यह मुद्दा कार्यवाही में शामिल था। सपा सदस्य संजय कुमार मिश्र ने कहा कि वित्तविहहीन शिक्षकों को पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में दिये जा रहे मानदेय को बंद करने के खिलाफ गत 15 मई को लखनऊ में किये गये प्रदर्शन के दौरान उपमुख्यमंत्री शर्मा और सम्बन्धित प्रमुख सचिव से बातचीत हुई थी।

उन्होंने कहा कि बैठक के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अनिल बाजपेयी ने वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय देने की नीति जारी रखने की घोषणा की थी। ऐसे में इससे जुड़े सवाल पर सरकार का जवाब गैर जिम्मेदाराना है। नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा कि यह एक गम्भीर मुद्दा है और हम इस पर कोई चर्चा नहीं करना चाहते, केवल सरकार का वक्तव्य चाहते हैं। बाद में, सरकार के रऊख से असंतुष्ट होकर सभी सपा सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गये।

– (भाषा)