बदहाली के मारे किसानों को सूखा राहत का इंतजार


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महोबा: किसानों को सौगात तो मिल रही है लेकिन आखिर यह कहां जा रही है यह किसी को पता नहीं किसान अब भी परेशान है। बदहाली के मारे किसानों को सूखा राहत का इंतजार है। दो वक्त की रोटी को मोहताज बड़े काश्तकार हो गए है। हर बार योजना का लाभ दिया जाता है तो वह छोटे किसानों को लेकिन आखिर बड़े काश्तकार कहां जाए। सूखा राहत के नाम पर लेखपालों के द्वारा शोसण और किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है। जिन किसानों ने कमीशन दिया उन्हें योजनाओं का लाभ मिला पर जिसने नहीं दिया वह आज भी सूखा राहत राशि पाने के लिए भटक रहे है।

चेक खाते में भेजने के एवज में मोटा कमीशन वसूला जाता है और सरकार धन का बंदरबांट लंबे अर्से से किया जाता है जिससे किसान परेशान है। बुंदेलखंड के महोबा जनपद में अन्नदाताओं से मजाक किया जा रहा है। शासन और प्रशासन एक ओर दावा कर रहा है कि हर गांवों के गरीब असहायों को चेकों का वितरण भी कराया जा रहा है। लेकिन सूखे की छोड़े अतिवृस्टि की चेकों का भी अब तक कोई राशि नहीं मिल पा रही है।

लेकिन अब भी कई गांवों के लोग ऐसे है जिन्हें आज तक कोई मदद नहीं मिल सकी है और उन्हें भटकना पड़ रहा है। सर्वाधिक परेशान बड़े काश्तकारों को होना पड़ रहा है। लेखपाल की मनमानी का खामियाजा भी गांव के गरीब लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आए दिन तहसील और कलेक्ट्रेट में आकर किसानों को प्रदर्शन कर राहत राशि देखा जा सकता है। किसान अधिकारियों और बैंकों के बीच फुटबाल बनकर रह गया है।

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 – रितुराज राजावत