यमुना का जल आचमन लायक भी नहीं है


मथुरा : करोड़ो लोगों को जीने का साजोसामान मुहैया कराने वाली देश की प्रमुख नदियों में एक यमुना प्रदूषण के चलते कान्हानगरी मथुरा में अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। कचरे और गिरते नालों ने यमुना का जल आचमन लायक भी नहीं रहा है। यमुना को स्वच्छ रखने के लिए लगभग तीन दशक से प्रयास किये गए। उच्च न्यायालय के आदेश से लेकर जन आंदोलन तक किये गए, जनमानस का दिल्ली कूच भी हुआ किंतु सभी प्रयास ‘ढाक के तीन पात’ ही साबित हुए। यह हाल तब है जब कि यमुना मथुरा की ”जीवनरेखा” है।

चतुर्वेद समाज का तो कोई कार्यक्रम बिना यमुना पूजन के अधूरा रहता है। चुनाव में नामांकन दाखिल करने के पहले सभी नेता यमुना पूजन करते हैं, मनोकामना पूरी करने के लिए समय समय पर चुनरी मनोरथ होता है मगर दिल्ली के कचरे और मथुरा के गिरते नालों ने यमुना का जल आज पीना तो छोड़ आचमन करने लायक भी नहीं रहा है। हिन्दू मान्यताओं अनुसार मोक्ष प्रदायिनी होने के कारण मथुरा में हर साल आनेवाले लगभग 25 करोड़ श्रद्धालुओं में से अधिकांश यमुना स्नान और यमुना जल पान करने का प्रयास करते हैं।

यम की फांस से मुक्ति पाने के लिए यमद्वितीया पर तो देश के कोने कोने से लोग आकर अपनी बहनों के साथ विश्रामघाट पर यमुना में स्नान करते हैं। विश्वविख्यात द्वारकाधीश मंदिर के जन संपर्क अधिकारी राकेश चतुर्वेदी एडवोकेट ने बताया कि गुजरात के श्रद्धालु तो यहां यमुना में स्नान करने के बाद लोटी में यमुनाजल भरकर उसे सील कराकर गुजरात ले जाते हैं तथा एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन कर वे उस जल को खोलते हैं।

लगभग तीन दशक पहले मथुरा बार एसोसियेशन के पूर्व अध्यक्ष उमाकांत चतुर्वेदी के नेतृत्व में यमुना को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए आंदोलन चला जिसमें चतुर्वेद समाज की प्रमुख भूमिका थी जिसे तत्कालीन अधिकारियों ने झूठा आश्वासन देकर किसी प्रकार समाप्त करा दिया। इसके बाद प्रदेश सरकार के तत्कालीन मंत्री दयालकृष्ण एडवोकेट के प्रयास से यमुना को प्रदूषणमुक्त रखने के लिए यमुना में नालों के गिरने से रोकने की प्रक्रिया शुरू हुई तथा नालों को टेप किया गया किंतु अधिकारियों ने इसमें भी खेल किया और सभी नाले टेप नही किये गए।

नगरपालिका परिषद मथुरा के पूर्व अध्यक्ष श्यामसुन्दर उपाध्याय उर्फ बिट्टू ने बताया कि लगभग तीन दशक पूर्व गोकुल बैराज का निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी के कार्यकाल में शुरू हुआ तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासन में तत्कालीन मंत्री लाल जी टंडन ने इस आधे अधूरे बैराज का उद्घाटन भी कर दिया। कहा गया था कि गोकुल बैराज बनने से विश्राम घाट पर निर्मल जल मिलेगा मगर यमुना में नालों का गिरना न रूकने के कारण बैराज सीवर के तालाब में बदल गया।

–  (वार्ता)