भक्तिभाव से मनाया भोले महाराज का जन्मोत्सव


नई दिल्ली: हंस कल्चरल सेंटर द्वारा आध्यात्मिक गुरु एवं समाजसेवी भोलेजी महाराज का पावन जन्मोत्सव श्री हंसलोक आश्रम में बड़ी ही श्रद्धा, प्रेम और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस मौके पर कई धार्मिक, सामाजिक व राजनैतिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों, साधु-सन्तों तथा श्रद्धालु भक्तों ने भोलेजी महाराज को यशस्वी एवं दीर्घायु होने की शुभकामनाएं दीं। समारोह में माताश्री मंगला जी ने कहा कि आज हमारा समाज बहुत ही विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है। आपसी प्रेम के अभाव में पारिवारिक रिश्ते-नाते दिन-प्रतिदिन कमजोर पड़ते जा रहे हैं। चारों तरफ भय, असुरक्षा तथा अशांति का माहोल है जिसके चलते लोगों में हताशा की भावना बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि हताशा से भरे इस वातावरण को दूर करने के लिए हमें अपने संत-महापुरुषों के अध्यात्मज्ञान को जीवन में अपनाना होगा।

अध्यात्म ज्ञान के व्यापक प्रचार-प्रसार से ही समाज की सभी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। माता मंगलाजी ने संत-महात्माओं तथा श्रद्धालु-भक्तों की ओर से भोलेजी महाराज को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि हमारी हंसजी महाराज व माता राजेश्वरी देवी से प्रार्थना है कि भोलेजी यशस्वी व दीर्घायु हों और अपने भक्तों को सेवा व ज्ञान के मार्ग पर लगाकर उन्हें हमेशा आनंद देते रहें। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। भक्ति, ज्ञान तथा मोक्ष के दाता भगवान शिव छोटी सी सेवा से प्रसन्न होकर भक्त पर अहेतु की कृपा करते हैं लेकिन सेवा करते समय भक्त के अंदर अहंकार तथा छल-कपट नहीं होना चाहिए। इस मौके पर श्री भोले जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार माला में अनेक फूल होते हैं किन्तु फूलों को पिरोने वाला धागा एक ही होता है, इसी प्रकार हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई, आस्तिक तथा नास्तिक सभी ईश्वर रूपी माला के सुन्दर फूल हैं तथा आत्मारूपी धागा उन सबके अन्दर समान रूप से मौजूद है। जब हम सद्गुरु महाराज से उस आत्मारूपी धागे को समझ जाएंगे तो फिर समाज में धर्म व सम्प्रदाय के नाम पर कोई किसी से नफरत नहीं करेगा।

भोले जी महाराज ने-मुझमें राम, तुझमें राम, सबमें राम समाया तथा मानुष जनम अनमोल रे आदि भजन गाकर श्रद्धालु-भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।। उन्होंने श्री हंसलोक आश्रम परिसर में फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण की रक्षा व शुद्धिकरण के लिए लोगों को प्रेरित किया। महात्मा आत्मसंतोषी बाई तथा महात्मा शिव कृपानंद ने भी सत्संग विचारों से जनमानस को लाभान्वित किया। गुजरात से आये प्रख्यात भजन गायक बंकिम पाठक तथा अलीगढ़ से आये यज्ञदत्त शर्मा एवं भोले भजन मंडली ने भगवान शिव, गुरु, सत्संग की महिमा से जुड़े भजन तथा बधाई गीत प्रस्तुत कर माहोल को भक्तिमय बना दिया।