सरकारी स्कूलों में शिक्षा के बदतर हालात में वित्त सचिव तलब


नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा के बदतर हालात पर जारी गाइड लाइन का अनुपालन नहीं करने के मामले में राज्य के शिक्षा सचिव के बाद आज वित्त सचिव को तलब किया और उन्हें 24 घंटे के अंदर यानी कल व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। न्यायालय में अब कल शिक्षा सचिव के साथ ही वित्त सचिव भी पेश होंगे। साथ ही न्यायालय ने विभाग के अधिकारियों के ठाठबाट पर भी रोक लगाने के आदेश जारी किये हैं।

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न्यायालय में आज पूर्व आदेश के कारण शिक्षा सचिव चंद्रशेखर भट्ट व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। शिक्षा सचिव ने न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं आलोक सिंह  की युगल पीठ को बताया कि खंडपीठ के पूर्व आदेश के क्रम में शिक्षा विभाग की ओर से 903 करोड़ रूपये का एक प्रस्ताव सरकार और वित्त विभाग को भेजा गया है। वित्त विभाग की ओर से उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी और ना ही बजट आवंटित किया गया है।

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शिक्षा सचिव के बयान को गंभीरता से लेते हुए युगल पीठ ने तत्काल वित्त सचिव को तलब करने के निर्देश जारी कर दिये। सरकार की ओर से इस मामले में कुछ समय लेने की मांग की गयी लेकिन युगल पीठ की ओर से सरकार को कोई राहत प्रदान नहीं की गयी। देहरादून निवासी दीपक राणा की ओर से न्यायालय में सर्विस संबंधी मामला दायर किया गया था। उसी से संबंधित मामले में प्रदेश में स्कूलों की बदहाल स्थिति का मामला सामने आया।

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युगल पीठ ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका दायर कर दी। सरकार की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए खंडपीठ ने पिछले साल 19 नवम्बर 2016 को एक आदेश जारी कर दस बिदुंओं की एक गाइड लाइन जारी की थी। जिसके अंतर्गत सभी स्कूलों में पेयजल, मिड डे मील की व्यवस्था करने, पर्याप्त संख्या में कंप्ययूटर लगाये जाने, शौचालय बनाये जाने, किताबें और ड्रेस उपलब्ध कराने व पुराने भवनों की मरम्मत कराने की बात कही गयी थी। याचिकाकर्ता की ओर से पीठ को बताया गया कि सरकार द्वारा गाइड लाइन का पालन नहीं किया गया है। इसके बाद खंडपीठ ने शिक्षा सचिव को पेश को पेश होने को कहा।

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आज सुनवाई के दौरान न्यायालय ने शिक्षा सचिव के साथ ही वित्त सचिव को भी पेश होने के निर्देश दिये। न्यायालय ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के ठाटबाट पर भी सख्त रूख अख्तियार करते हुए इसपर रोक लगाने का आदेश दिया। युगल पीठ की ओर से कहा गया कि जब तक मामले का पूरी तरह से समाधान नहीं होता तब तक विभाग के अधिकारियों के ठाटबाट जैसे लग्जरी खरीद फरोख्त कार, एसी, वाटर प्यूरी फायर एवं अन्य महंगी वस्तुओं की खरीद पर रोक रहेगी।