उत्तराखंड में बाघों के लिये पहला मानवनिर्मित रहवास बना


हल्द्वानी: उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले में तराई पूर्वी वन प्रभाग की डौली रेंज में बाघों और हाथियों के लिये कृत्रिम रहवास के तौर पर देश में पहली बार एक मानव निर्मित ग्रासलैंड विकसित किया गया है। पश्चिमी वन वृथ के वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि भारत में कृत्रिम रूप से तैयार किया गया यह अपनी तरह का ग्रासलैण्ड हैं जिसमें तराई की लगभग 39 स्थानीय घास प्रजातियों का रोपण किया गया हैं। उन्होंने बताया कि इस कृत्रिम रहवास को अपना कर बाघों ने भी इसे अपनी मंजूरी दे दी है।

धकाते ने बताया कि निष्प्रयोज्य 60 हेक्टेअर वन भूमि पर विकसित यह कृत्रिम वासस्थल 2015 से 2016 तक दो वर्षों की अवधि में मात्र चौदह लाख रूपये की लागत से तैयार किया गया। यहां एक विशालकाय बाघ और एक बाघिन अपने दो शावकों के साथ विचरण कर रही है जिसकी पुष्टि कैमरा ट्रेप से प्राप्त चित्रों से हुई है। यहां जंगली हाथियों का आवागमन तो प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहा है।

वन अधिकारी ने बताया कि मांसाहार और शाकाहार की भोजन श्रृंखला के शीर्ष पर विराजमान क्रमश: बाघ और हाथी यदि किसी भी जंगल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हो तो ये वन्य जीवविज्ञान के हिसाब से आदर्श रहवास माना जाता है। धकाते ने बताया कि इसी तरह का एक अन्य रहवास स्थल 38 हेक्टेयर भूमि पर कोटखर्रा दक्षिण में तैयार किया जा रहा है। पश्चिमी वृथ के अधीन पाच वन प्रभागों के जंगल नेपाल उथरप्रदेश की सीमा से सटे है। नेपाल सीमा स्थित टनकपुर से लेकर पीलीभीत, बरेली की सीमा तक के तराई के पश्चिमी वृथ के जंगल में निरन्तरता कायम है।

वन अधिकारी ने वृत्त में बाघों और हाथियों की संख्या में बढ़ोत्तरी का श्रेय सशस्त्र सीमा बल को दिया जिनकी वजह से नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में जानवरों के शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में काफी कमी दर्ज की गयी। वर्ष 2016 में भारत में पहली बार किसी क्षेत्रीय वृथ में कैमरा ट्रैप के माध्यम से बाघों की गणना की गई थी जिसमें पश्चिमी वन वृथ में 119 वयस्क बाघ पाये गए थे। वर्ष 2015 की हाथी गणना में 197 हाथी गिने गये थे।

वन अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2013 से पश्चिमी वन वृथ के अधीन पांच वन प्रभागों के लिये तीन करोड़ रू की धन राशि मुहैया होने के बाद से संरक्षण का स्तर बढ़ा और उसके कारण वन्य जीव भी बढ़ रहे हैं जिसके लिये वन्य जीवों विशेषकर बाघों के लिये कृत्रिम रूप से मानव निर्मित रहवास का तरीका ईजाद किया गया।केभाषा सं दीप्ति