संस्कृत शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के निर्देश


देहरादून: प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री अरविन्द पाण्डेय की अध्यक्षता में विधानसभा स्थित उनके कक्ष में संस्कृत शिक्षा संवर्धन विषयक बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में अनेक विषयों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये, जिनमें पूर्व मध्यमा व उत्तर मध्यमा ,शास्त्री व आचार्य एवं शोध् विषयक पढ़ाये जा रहे पाठ्यक्रमों पर चर्चा के दौरान संस्कृत शिक्षा को रोजगार परक बनाने के मध्यनजर शिक्षामंत्री ने पुनरीक्षण के निर्देश दिये। संस्कृत के विद्यालयों में योग्य शिक्षकों की तैनाती के उदेश्य से उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा परिषद द्वारा टीईटी आयोजन के लिए संस्कृत शिक्षा परिषद में परीक्षण करने के निर्देश दिये गये।

शिक्षा मंत्री द्वारा गढ़वाल एवं कुमाऊं में एक-एक आदर्श आवासीय संस्कृत विद्यालय खोले जाने के निर्देश दिये गये। शिक्षा मंत्री द्वारा कक्षा 1-5 तक डे-बोर्डिंग तथा कक्षा 6 से 12 तक आवासीय विद्यालय संचालित करने से सम्बन्धित प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश शिक्षा मंत्री द्वारा दिये गये। वर्तमान में अधिकतर संस्कृत विद्यालय व महाविद्यालय एक ही परिसर से संचालित हैं तथा वर्तमान में 46 महाविद्यालय यूजीसी के मानकानुसार संस्कृत विद्यालय से सम्बद्ध हैं अथवा नहीं, इस सम्बन्ध में सचिव संस्कृत को महाविद्यालयवार विस्तार से स्थिति विश्वविद्यालय से स्पष्ट कराने के निर्देश शिक्षा मंत्री द्वारा दिये गये। बैठक में श्रीमती ऊषा शुक्ला, विनोद रतूड़ी, आरके कुंवर तथा भूपेन्द्र नेगी एवं गिरधर सिंह भाकुनी उपस्थित थे।

– सुनील तलवाड़