आयुर्वेदिक कॉलेज में अव्यवस्था पर भड़के मंत्री


हरिद्वार: आयुष मंत्री हरक सिंह रावत ने राज्य के सरकारी अस्पतालों (एलोपैथिक) को प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में हजार गुना बेकार बताया। उन्होंने राज्य के आयुर्वेदिक अस्पताल को सरकारी एलोपैथिक अस्पतालों से भी बदतर बताते हुए कहा कि यहां की व्यवस्थाएं इस कदर खराब हैं कि कोई भी इनमें भर्ती नहीं होना चाहेगा। ऐसे में इनका क्या औचित्य। हरिद्वार में दवा विक्रेताओं के एक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के बाद गुरुकुल आयुर्वेदिक कॉलेज व अस्पताल के औचक निरीक्षण को पहुंचे मंत्री हरक सिंह रावत ने अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई। अस्पताल में फैली गंदगी व अव्यवस्थाओं पर काफी नाराज दिखे।

कहा सरकारी एलोपैथिक अस्पताल निजी अस्पतालों से 1000 गुना बेकार हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल तो एलोपैथिक अस्पतालों से भी बदतर हैं। कहाकि यह तो वही स्थिति हुई कि सरकारी विद्यालयों के शिक्षक अपने बच्चों को अपने विद्यालय में पढ़ाने की बजाय कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाते हैं।’ निर्देश दिये कि आयुर्वेदिक अस्पतालों की व्यवस्था में इस तरह का परिवर्तन लाया जाए, जिससे उसका मुकाबला एलोपैथिक से होने लगे।

उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से हर बात के लिए सरकारी या सरकारी बजट पर निर्भर न रहने की सलाह देते हुए उन्हें निजी सहायता, अनुदान के जरिये भी अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए। कहा कि अस्पताल परिसर में चारों ओर उगी झाड़ियां साफ करने सरकार नहीं आएगी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से आयुर्वेदिक अस्पताल के रजिस्ट्रार डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी की ओर से सरकारी बजट और व्यवस्थाओं की बात रखी तो आयुष मंत्री ने प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा।

– संजय चौहान