मातृशक्ति देश की मुख्य धारा का हिस्सा


रुद्रपुर: मातृमण्डल सेवा भारती उत्तराखण्ड का सात दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग जिसमें महिलाओं को बौद्धिक, शारीरिक दक्षता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रदर्शन के साथ सम्पन्न हुआ। मातृमण्डल की प्रदेश अध्यक्षा श्रीमती रीता गोयल ने बताया कि उत्तराखण्ड प्रान्त का यह दूसरा वर्ग है। इस वर्ष के वर्ग में केवल उत्तराखण्ड की बहिनें शामिल हुयी। कक्षा 9 वीं से ऊपर एवं 45 वर्ष तक की आयु वर्ग की 137 बहिनों ने वर्ग में प्रतिभाग किया। शारीरिक दक्षता के कार्यक्रमों के साथ-साथ आर्थिक स्वावलम्बन जगाने वाले अनेक प्रशिक्षण दिये गये जिनमें मोमबत्ती बनाना, पेपर ज्वैलरी बनाना, व्यूटीशियन, रंगोली बनाना, मेंहदी लगाना, दीप सज्जा, तथा सांस्कृतिक नृत्य प्रशिक्षण, आदि शामिल थे। मातृमण्डल सेवा भारती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा विभाग के अर्न्तगत मातृशक्ति के बीच कार्य करने वाला संगठन है, भारत में आज मातृशक्ति जागरण की आवश्यकता है मातृमण्ड़ल समाज का आह्वान करती है कि हम सभी अपने समय और साधनों का उपयोग अभाव ग्रस्त अपने समाज के बन्धुओं के उत्थान में करें।

कार्यक्रम अध्यक्ष नगर निगम अधिकारी रूद्रपुर श्रीमती दीप्ति आर वैश्य द्वारा अपने सम्बोधन में कहा कि आज के युग में इस प्रकार के आयोजन अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि आज समाज में महिलाओं को कदम -कदम पर अनेक समस्याओं व अक्षेपों का सामना करना पड़ता है तथा उनके साथ यदि कोई छेड़-छाड़ या कोई अन्य घटना घटित हो तो उस परिस्थिति का सामना वह कैसे करे ऐसे आयोजनों से महिलाओं में आत्मविश्वास के साथ-साथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण उनकी रक्षा करता है। कार्यक्रम के मुख्य अथिति अपर जिलाधिकारी श्री जगदीश चन्द्र काण्डपाल ने कहा कि आज से 20-25 वर्ष पूर्व महिलायें चौके-चूल्हे तक ही सीमित थी लेकिन आज समाज के बीच में समाज के विकास की मुख्य धारा में बराबर की सहभागी है।

महिलाओं की समाज में अपने आप को स्थापित करने हेतु इस प्रकार के प्रशिक्षण अनिवार्य हैै जिससे वह बुरे वक्त में अपने परिवार का गुजर बसर करने के लिए स्वरोजगार करने के साथ-साथ आत्म रक्षा एवं आत्मविश्वास से लवरेज रहती है। मुख्य वक्ता श्री शिवेन्द्र कश्यप प्रोफेसर गो.ब.पन्त विश्वविद्यालय पन्तनगर द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि सेवा भारती जैसे संगठन समाज की सवेदना को जागृत करने का कार्य कर रहे है।