चीन से खतरा नहीं


देहरादून: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को एम.के.पी. पीजी काॅलेज में भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित स्वाधीनता समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एमकेपी कॉलेज में शौर्य दीवार का भी लोकार्पण किया। इस दीवार पर देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले महान शहीदों, परमवीर चक्र विजेताओं की तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया है। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत छोडो आंदोलन और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि लम्बे संघर्ष, त्याग और बलिदान से भारत को आजादी मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड में भारत की चीन सीमा पर किसी भी तरह का खतरा नहीं है। भारतीय सेना मजबूत है और किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने में सक्षम है। केंद्र सरकार से लगातार चीन सीमा को लेकर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

भारत वर्ष ने कभी भी दांस्ता स्वीकार नहीं की

उन्होंने कहा कि भारत वर्ष ने कभी भी दांस्ता स्वीकार नहीं की। भारत का इतिहास दासता का इतिहास नही बल्कि आजादी के लिए संघर्ष का इतिहास रहा है। भारत का इतिहास लिखने वाले कुछ लेखको की मानसिकता राष्ट्रवादी नहीं थी, जिसके कारण क्रांतिकारियों और शहीदों को कभी विद्रोही तो कभी आतंकवादी कहा गया। देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वालों को पथभ्रष्ट देशभक्त तक कहा गया। पिछले कुछ दिनों के अन्तराल पर उत्तराखण्ड के दो सपूतों मेजर कमलेश पाण्डे और शहीद पवन सिंह सुगड़ा का श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश बहुत मजबूत है। सीमा पर चीन और पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। उन्होंने कहा कि देश के युवा को आज देशभक्ति की भावना के साथ देश के लिए जीने की जरूरत है। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत, विधायक खजान दास, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भी समारोह को संबोधित किया।

– सुनील तलवाड़