दोनों पीठों के उत्तराधिकारी नामित


हरिद्वार: ज्योतिष और द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी शंकराचार्य स्वामी ने कहा कि उन्होंने दोनों पीठों के लिए उत्तराधिकारी नामित कर लिए हैं। दोनों दंडी स्वामी संन्यासियों को दंड भी प्रदान किया जा चुका है। हालांकि नाम का खुलासा करने से इन्कार करते हुए उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के जीवित रहते ऐसा करना विधान के विरुद्ध है। गाैरतलब है कि विगत फरवरी, 17 में काशी विद्वत परिषद के विद्वानों की उपस्थिति में भूमा पीठाधीश्वर अच्युतानंद का ज्योतिष और द्वारका पीठ के शंकराचार्य घोषित किया गया था। अखाड़ा परिषद इसका विरोध कर रही है। तब से शंकराचार्य को लेकर विवाद चल रहा है।

इस पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि एक सुयोग्य पात्र शंकराचार्य के रूप में चारों पीठों को को एक साथ धारण कर सकता है, लेकिन एक पीठ पर दो शंकराचार्य कभी विराजमान नहीं हो सकते। ऐसे में किसी पीठ पर शंकराचार्य के विराजमान रहते कोई दूसरा शंकराचार्य कैसे हो सकता है। साफ है कि वह दूसरा फर्जी है। उन्होंने कहा कि दोनों पीठों पर मेरे उत्तराधिकारी मेरी सेवा में हैं और उनसे शंकराचार्य के पद के अनुरूप आचरण की दीक्षा ले रहे हैं। कहा कि समय आने पर उनका प्रकटोत्सव हो जाएगा।

ढोंग में फंस गए स्वामी अच्युतानंद: भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद के शंकराचार्य बनने पर टिप्पणी करते हुए स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि वह ढोंग में फंस गए हैं। कहा कि पहले अच्युतानंद मेरे शिष्य थे, मैंने उन्हें समझाने की कोशिश भी की, लेकिन जब वे नहीं माने तो मैंने किनारा कर लिया।

राम मंदिर को लेकर भाजपा पर लगाए आरोप: शंकराचार्य ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपनी कमी और गलती को छुपाने के लिए राम मंदिर निर्माण को कोर्ट से बाहर मुस्लिम पक्ष से बातचीत करने की बात कह रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट में यह बात लगभग साबित हो चुकी है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद थी ही नहीं। ऐसे में अगर कोर्ट में यह मामला चलता है तो बाद में भाजपा की इस मामले में किरकिरी होना स्वभाविक है। जब यह सवाल उठेगा इज्जत अयोध्या में बाबरी मस्जिद थी ही नहीं तो भाजपा के उकसावे पर कारसेवकों ने किस ढांचे को ढहाया।

अब भाजपा अपनी गलती और कमी को छुपाने के लिए कोर्ट से बाहर समझौते का नाटक कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की यह बात कि कोर्ट के बाहर इस मामले में समझौता कर लिया जाए सुब्रमण्यम स्वामी की देन थी, जबकि कोर्ट ने इन्हें बाद में कोई पक्षकार ना होने के कारण मामले से बाहर कर दिया है। भाजपा कोर्ट के बाहर मुस्लिम पक्ष से बातचीत करने का ढोंग कर रही है, जबकि इस मामले में कोर्ट में पक्षकार मुस्लिम पक्ष से अभी तक कोई बातचीत नहीं की गई है। मामले में मुस्लिम पक्ष बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी अपना दावा वापस ले ले तो कोर्ट मंदिर बनाने की इजाजत दे सकता है।

– संजय चौहान