पूर्णागिरी मंदिर बंद करना गलत


हरिद्वार: भारत साधु समाज की बैठक जोशीमठ के पूर्णागिरी मंदिर पर केंद्रित रही। बैठक में द्वारका व ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि राज्य सरकार ने पूजा के अधिकार को लेकर अनशन कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को जबरन उठाकर नास्तिकों जैसा व्यवहार किया है। उन्हें भी सामान्य भक्त की तरह मंदिर में पूजा-अर्चना का अधिकार है। बैठक में इस मुद्दे को लेकर जल्द ही आंदोलन खड़ा करने का निर्णय लिया गया। खड़खड़ी स्थित जयराम आश्रम में हुई बैठक में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा राम हमारे आराध्य हैं।

युवा पीढ़ी जब श्रीराम के आदर्शों पर चलेगी, तभी आने वाली पीढ़ी भारतीय संस्कृति एवं हिंदू धर्म की महत्ता को समझ सकेगी। भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा पूर्णागिरी मंदिर बंद करके राज्य सरकार ने निंदनीय कार्य किया है। इसके लिए संत समाज एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आंदोलन करेगा। साधु समाज के महामंत्री धर्माचार्य स्वामी हरिनारायणानंद ने राज्य सरकार से सवाल किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कौन सी अनुचित मांग कर रहे थे। ज्योतिर्मठ के संविधान के मुताबिक पूर्णागिरि और नृसिंह मंदिर उन्हीं के अधीन है। फिर उन्हें पूजा से कैसे वंचित किया जा सकता है।

साधु समाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता स्वामी ऋषिश्वरानंद ने कहा अनशनरत अविमुक्तेश्वरानंद की चेतावनी के बाद मंदिर का ताला नहीं खुला तो उन्होंने पानी भी त्याग दिया। उन्हें जबरन उठाना घोर निंदनीय है। बैठक में रामायण सीरियल में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल ने कहा कि आज युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति के पीछे भाग रही है। मुंबई में युवा पीढ़ी यह तक नहीं मालूम कि शंकराचार्य कौन होते हैं। यह हिंदू धर्म के लिए दुखदायी है। इस मौके पर श्यामसुंदर दास शास्त्री, शिवम महंत, स्वामी देवानंद सरस्वती, ब्रह्मचारी श्रीधरानंद आदि ने भी विचार रखे।

– संजय चौहान