राज्य में स्वाइन फ्लू ने पैर पसारे


देहरादून: उत्तराखण्ड राज्य में स्वाइन फ्लू धीरे-धीरे पैर पसारने लगा है। अब तक स्वाइन फ्लू से कई मौतें भी हो चुकी हैं। अभी हाल ही में हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में भर्ती 82 साल की बुजुर्ग महिला में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुयी है। देहरादून में स्वाइन फ्लू के अब तक 25 संदिग्ध मामलों की जांच के लिए खून के सैंपल दिल्ली नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनएसडीसी) भेजे जा चुके हैं। सीएमओ डा. टी.सी. पंत का कहना है कि ऋषिकेश निवासी एक 82 वर्षीय महिला कापफी समय से हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में भर्ती है। उनकी रिपोर्ट दिल्ली से आयी। जिसमें स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुयी है। सीएमओ का कहना है कि 25 मामलों को अभी एनएसडीसी भेजा गया है। जिनमें से पांच में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। यह मामले देहरादून के विभिन्न प्राइवेट अस्पतालो से आए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भारत सरकार के दिशा निर्देशानुसार राज्यों से एच1एन1 के सैम्पल उक्त वर्णित, चिन्हित लैबों में ही निःशुल्क परीक्षण के लिए भेजे जाते हैं। उत्तराखण्ड राज्य में वर्तमान में एच1एन1 जांच हेतु प्रथक से कोई लैब नहीं है इस कार्य के लिए एनसीडीसी दिल्ली लैब ही एच1एन1 जांच हेतु अधिकृत है। भारत के दिशा निर्देशानुसार एच1एन1 के मरीजों को लक्षण के आधर पर कैटेगरी ए, बी व सी में वर्गीकृत किया जाता है तथा कैटेगरी के आधार पर ही उपचार होता है। केवल कैटेगरी सी के मरीजों का ही लैब परीक्षण करवाने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि स्वाईन फ्लू का वैज्ञानिक नाम इंफ्लूएंजा है। यह एच1एन1 वायरस (विषाणु) के कारण होता है। इसके वायरस में पाये जाने वाले जीन उत्तरी अमेरिका में सूअरों में पाये जाने वाले वायरस के ही समान पाये गये थे इसलिए इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन1) को स्वाईन फ्लू कहते हैं परतु यह बीमारी सूअरों से नही फैलती है। स्वाईन फ्लू के लक्षण बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, आंखो में जलन, डायरिया, उल्टी एवं सांस लेने में कठिनायी होती है।