संघ धर्मान्तरण का विरोधी नहीं


हरिद्वार: पतंजलि योगपीठ परिसर में आयोजित पांच दिवसीय संत सम्मेलन आज हर्षोल्लसपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। पतंजलि योगपीठ एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अनुसांगिक संगठन धर्म जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधन में आयोजित इस सम्मेलन के अंतिम दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत, पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज, पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण महाराज, गोविन्द गिरि महाराज, स्वामी हरिहरानन्द महाराज सहित अनेक संतों ने अपने विचार रखे और भारत के दिव्यता युक्त पुनर्निर्माण का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा पतंजलि योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति व भारत के ज्ञान-विज्ञान के उत्थान के लिए कार्य करने वाला एक अनोखा आध्यात्मिक संगठन है।

उन्होंने कहा आचार्य श्री ने योग-आयुर्वेद व भारतीय संस्कृति परक आंदोलन के माध्यम से करोड़ों भारतीयों को देश की मौलिकता से जोड़ा है। संघ का भी यही अभियान है, हमारी संस्कृति का काम किसी का विरोध करना नहीं है, अपितु लोगों को सुविचार देना है। हम लोगों को सुख के राह पर व विश्व को मानवता की राह पर ला रहे हैं। उन्होंने कहा भारत के सभी पूर्वज हिन्दू ही हैं। संघ धर्मान्तरण का विरोधी नहीं है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा आज का दिन स्वामी विवेकानन्द द्वारा शिकागो में दिये गये भाषण का दिवस है। आचार्य श्री ने कहा संघ एक प्रकार से संतों का ही संघ है।

राष्ट्रनिर्माण में समर्पित हर साध्क की भूमिका संत के समान है। आचार्य श्री ने कहा विश्व की समस्याओं को सदियों से समाधन देता रहा है भारत। भारतीय संस्कृति को हमारे ऋषियों ने तप-त्याग के बल पर दुनियां की सबसे जीवंत संस्कृति बनाया है। आज जब सम्पूर्ण विश्व समाधन के लिए भारत की ओर निहार रहा है। ऐसी परिस्थिति में हमारे साधु-संतों की भूमिका बढ़ जाती है। क्योंकि हमारे साधु-संत हमारे राष्ट्र के आदर्श हैं और इनके व्यक्तित्व से हमारी प्राचीनतम कल्याणकारी ध्रोहर योग, आयुर्वेद, वेद, उपनिषद संस्कृति एवं ज्ञान-विज्ञान की परम्परायें अभिव्यक्ति पाती हैं।

– संजय चौहान