हर धर्म से परे है योग : विशेषज्ञ


संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र में इंटरनेशनल योग दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि योग हर धर्म से परे है और इससे केवल शारीरिक एवं भावनात्मक लाभ ही नहीं मिलता बल्कि यह वैश्विक सतत विकास एवं शांति में भी योगदान देता है।

संयुक्त राष्ट्र में इंडिया के स्थायी मिशन ने वैश्विक संस्था के मुख्यालय में कल Convention on Yoga for Health  पर स्पेशल सेशन आयोजित किया जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) न्यूयार्क की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नता मेनाब्दे, एक्टर अनुपम खेर, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती समेत कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

नता मेनाब्दे ने लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि योग का इस्तेमाल हमारी जटिल एवं मुश्किल विश्व को एकजुट करने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल केवल स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए ही नहीं बल्कि विश्व में शांति एवं सुरक्षा के लिए किया जा सकता है।

नता मेनाब्दे  ने बताया कि योगाभ्यास सभी के लिए स्वस्थ जीवन एवं कल्याण पर ध्यान केंद्रित करने वाला सतत विकास लक्ष्य नंबर 3 को हासिल करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

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योग को जीवन का समग, विज्ञान बताया। उन्होंने बताया कि योग एकजुट करने वाली अवधारणा है जो संकट की स्थिति झेल रहे लाखों लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है।

उन्होंने बताया कि यह सभी धमो, नस्लों एवं राष्ट्रीयता के लोगों के लिए है क्योंकि योग कोई धर्म नहीं है। योग जीवनशैली है।  साध्वी भगवती सरस्वती ने योग को जुड़ाव एवं संपूर्णता की एक प्रणाली करार दिया जो लोगों को परिपूर्णता का एहसास कराती है। लोगों को यह एहसास इस आधार पर नहीं होता कि उनके पास कितना धन है या वे कैसे दिखते हैं बल्कि ऐसा धार्मिक पूर्णता एवं मानसिक कल्याण के आधार पर होता है।

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एक्टर अनुपम खेर ने कहा कि योग ने उनके जीवन में कैसे बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खेर ने बताया कि योग ने उन्हें उनके पास जितना है, उतने में संतुष्ट रहने और खुद के प्रति सच्चे रहने सिखाया। उन्होंने रेखांकित किया कि योग आपको वह बनना सिखाता है, जो आप वास्तव में हैं।

एक्टर अनुपम खेर ने बताया कि लोग लगातार वह बनने की कोशिश करते हैं जो वे नहीं है। जब आप कोई और बनने की कोशिश करते हैं तो न तो आप वह रहते हैं, जो आप वास्तव में हैं और न ही आप कोई और बन पाते हैं। योग आपको वास्तविक बनना सिखाता है।

इससे पहले स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि विश्व को आज शांति एवं सद्भावना के संगीत से अधिक और कुछ नहीं चाहिए। योग यह काम कर सकता है। योग युद्ध, दीवारों एवं हिंसा की शुरूआत नहीं करता।

यह हर रंग, पंथ एवं संस्कृति के लिए है। योग के जरिए एकता की भावना पैदा की जा सकती है। उन्होंने बताया कि योग केवल शारीरिक लचीलापन ही नहीं बल्कि मानसिक लचीलापन लाता है।

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भारतीय स्थायी मिशन ने इससे पहले 20 जून को भी संयुक्त राष्ट्र के नॉर्थ लॉन में योगाभ्यास एवं ध्यान सत्र आयोजित किया था जो 2 घंटे चला था।

इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र दूतों एवं अधिकारियों समेत 1000 लोगों ने भाग लिया था। इसके अलावा हजारों लोग योगाभ्यास के लिए टाइम्स स्क्वैयर में भी एकत्र हुए थे।