इस्लामाबाद : पाकिस्तान ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ वैसे ही रिश्ते चाहता है जैसे कि उसके चीन के साथ हैं और वह अमेरिका को बंदूक चलाने के लिये अपने कंधे के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देगा। प्रधानमंत्री इमरान खान ने यह बात कही। प्रधानमंत्री खान ने गुरुवार को वाशिंगटन पोस्ट को दिये एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैं कभी भी ऐसा रिश्ता नहीं चाहूंगा जहां पाकिस्तान के कंधे पर रखकर बंदूक चलाई जाए- किसी और की लड़ाई लड़ने के लिये रकम दी जाए।’’ उन्होंने 1980 के दशक में सोवियत संघ की लड़ाई और आतंकवाद के खिलाफ चल रही जंग पर यह बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल अगस्त में अपनी अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया नीति की घोषणा करने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया था। उन्होंने अफगानिस्तान में आतंक के एजेंटों द्वारा अमेरिकियों की हत्या के बाद पाकिस्तान में सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने पर उसपर निशाना साधा था।

सितंबर में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सैन्य सहायता यह कहते हुए रद्द कर दी थी कि वह आतंकी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। पिछले महीने ट्रंप ने एक बार फिर पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिये अमेरिका की मदद का कोई प्रयास नहीं कर रहा है। इमरान ने कहा, ‘‘इससे हमें न सिर्फ इंसानी जानों का नुकसान हो रहा है, हमारे कबायली इलाके भी बर्बाद हो रहे हैं बल्कि इससे हमारी गरिमा पर भी प्रहार हो रहा है।’’ अमेरिका के साथ आदर्श रिश्तों की प्रकृति कैसी हो, यह पूछे जाने पर खान ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिये चीन के साथ हमारे रिश्ते एक पक्षीय नहीं हैं। यह दो देशों के बीच कारोबारी रिश्ता है। हम अमेरिका के साथ भी ऐसा रिश्ता चाहते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान चीन की तरफ ‘प्रतिरक्षा के लिहाज’ से नहीं झुक रहा बल्कि अमेरिका के रुख की वजह से द्विपक्षीय रिश्तों में यह बदलाव आया है।

क्रिकेटर से राजनेता बने खान ने खुद के ‘‘अमेरिका विरोधी’’ होने की बात को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी नीतियों के साथ असहमति उन्हें ‘‘अमेरिका विरोधी’’ नहीं बनाती। उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद साम्राज्यवादी रवैया है। ‘आप या तो मेरे साथ हैं या मेरे खिलाफ’।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह चाहेंगे कि पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में ‘‘गर्माहट’’ आए, खान ने कहा, ‘‘कौन महाशक्ति का दोस्त नहीं होना चाहेगा।’’