राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली सरकार ने 10 नवंबर तक डीजल वाहनों का इस्तेमाल न करने को लेकर एडवाइजरी जारी की है। दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहे करीब एक करोड़ वाहनों में से 5.71 लाख निजी वाहन डीजल से चलते हैं। इनमें से 10 साल पुराने डीजल वाहनों की संख्या 88 हजार के करीब हैं। जिनमें से अधिकांश का ऑनलाइन डाटा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में परिवहन विभाग के इन वाहनों का रिकॉर्ड तलाशना आसान नहीं होगा।

प्रदूषण की समस्या के मद्देनजर दिल्ली सरकार द्वारा डीजल वाहनों के इस्तेमाल पर रोक संबंधी एडवाइजरी के बाद अब परिवहन, पर्यावरण विभाग तथा ट्रैफिक पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है कि वह डीजल वाहनों के खिलाफ किस तरह कार्रवाई करें। इससे पहले एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने भी दिल्ली में 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर रोक लगाने का फैसला दिया था।

एनजीटी ने इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का आदेश दिया था। वहीं इस मुद्दे पर वाहन मालिकों का कहना है कि वे पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की तुलना में डीजल वाहनों का रजिस्ट्रेशन शुल्क करीब दोगुना उन्होंने दिया है, इस तरह विभाग अचानक रजिस्ट्रेशन रद्द करने का फैसला उचित नहीं है। परिवहन विभाग को डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन से अधिक आमदनी होती है।

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