दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके कहा है कि वह स्थानीय प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पूर्ण लॉकडाउन जैसे कदम उठाने के लिए तैयार है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, दिल्ली सरकार का मानना है कि इसका सीमित प्रभाव पड़ेगा।
SC ने निगमों को जिम्मेदार ठहराने पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई
वहीं उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से पूछा कि दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आप क्या बड़े कदम उठाने का प्रस्ताव रखते हैं। कोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण में पराली जलाए जाने का योगदान मात्र चार प्रतिशत है, ऐसे में इसे लेकर हल्ला मचाने का कोई आधार नहीं है। न्यायालय ने निगमों को जिम्मेदार ठहराने पर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई और कहा कि झूठे बहाने उसे प्रचार के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नारों पर खर्च और कमाई की लेखा परीक्षा कराने पर मजबूत करेंगे।
जीएनसीटीडी स्थानीय उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए पूर्ण लॉकडाउन जैसे कदम उठाने के लिए तैयार
न्यायालय ने केंद्र एवं राज्यों से इस बारे में फैसला लेने को कहा कि कुछ किन उद्योगों, वाहनों और संयंत्रों का संचालन कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। बता दें कि अपने हलफनामे में, दिल्ली सरकार ने कहा, “जीएनसीटीडी स्थानीय उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए पूर्ण लॉकडाउन जैसे कदम उठाने के लिए तैयार है। हालांकि, ऐसा कदम सार्थक होगा यदि इसे पड़ोसी राज्यों में एनसीआर क्षेत्रों में लागू किया जाता है। दिल्ली के कॉम्पैक्ट आकार को देखते हुए, लॉकडाउन का वायु गुणवत्ता व्यवस्था पर सीमित प्रभाव पड़ेगा।”
17 नवंबर तक सभी निर्माण और विध्वंस गतिविधियां तत्काल प्रभाव से बंद रहेंगी
सरकार ने कहा कि इस मुद्दे को एनसीआर क्षेत्रों से जुड़े एयरशेड के स्तर पर संबोधित करने की आवश्यकता होगी। दिल्ली सरकार ने अब तक उठाए गए कदमों को सूचीबद्ध करते हुए कहा कि इस सप्ताह स्कूलों में कोई फीजिकल कक्षाएं नहीं आयोजित की जाएंगी और सरकारी अधिकारी घर से काम करेंगे, और निजी कार्यालयों को भी अपने कर्मचारियों के लिए घर से काम करने की सलाह दी गई है। हलफनामे में कहा गया है, ’17 नवंबर तक सभी निर्माण और विध्वंस गतिविधियां तत्काल प्रभाव से बंद रहेंगी।’
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण पर गंभीरता से विचार किया
13 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण पर गंभीरता से विचार किया और सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो सरकार स्तर को नीचे लाने के लिए दो दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर सकती है, जो कि पराली जलाने, वाहनों, पटाखे, उद्योग और धूल के कारण उत्पन्न हुई है। शुरूआत में, मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमणा की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि ‘स्थिति बहुत खराब है .. घर में हम मास्क पहने हुए हैं। यह एक बुरी स्थिति है।’


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