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गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों और पुलिस के बीच तनातनी, दिल्ली में प्रवेश की कोशिश में प्रदर्शनकारी

दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर के पास आंदोलनरत किसानों ने गुरुवार को बैरिकेड्स तोड़कर राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर लिया और किसान दिल्ली की ओर से कूच करने में असफल रहे। भारत किसान यूनियन के दिल्ली-एनसीआर के अध्यक्ष पवन खटाना ने कहा, "अगर 24 घंटे में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो हम विभिन्न स्थानों पर सभी बैरिकेड्स को तोड़ देंगे और दिल्ली में प्रवेश करेंगे।"

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले हजारों किसानों ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश करने के लिए गाजीपुर सीमा पर और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर घेराबंदी की। दोपहर के करीब 100 ट्रैक्टरों के विरोध स्थल पर पहुंचने के बाद भीड़ भड़क गई। क्षेत्र में दिल्ली से लगने वाले बॉर्डर (सीमा बिंदुओं) पर जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं और यहां पर भारी पुलिस बल भी तैनात है। 

सुबह जब किसानों ने एक्सप्रेसवे को अवरुद्ध कर दिया था, तो ज्ञायेंद्र सिंह एसपी (सिटी) गाजियाबाद ने कहा था कि पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही दिल्ली की ओर जाने वाली प्रमुख सड़कों से नाकाबंदी खत्म हो जाएगी। सभी की निगाहें अब किसान यूनियनों और केंद्र के बीच जारी चौथे दौर की वार्ता पर टिकी हैं। तीसरे दौर की वार्ता मंगलवार को गतिरोध तोड़ने में विफल रही थी। 

मीटिंग के दौरान किसानों ने सरकार के लंच को ठुकराया, लंगर से मंगा कर जमीन पर बैठ कर किया भोजन

किसान पिछले आठ दिनों से दिल्ली-हरियाणा और दिल्ली-उत्तर प्रदेश की सीमाओं पर धरने पर बैठे हैं। सिंघु सीमा पर हजारों किसान डेरा डाले हुए हैं, जबकि कई अन्य समूह टीकरी बॉर्डर पर टिके हुए हैं। इसके अलावा दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर व चिल्ला में किसान आवागमन बाधित कर किए हुए हैं। 

किसानों की मांग है कि सितंबर में संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को निरस्त किया जाए। किसानों ने इस आशंका को व्यक्त करते हुए यह मांग की है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली खत्म हो जाएगी और वह बड़ी कंपनियों पर निर्भर हो रह जाएंगे। 

हालांकि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि कानून किसानों को बेहतर अवसर प्रदान करेंगे। सरकार ने विपक्षी दलों पर किसानों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है।