उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि दिल्ली अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमणों की वजह से गंभीर समस्या का सामना कर रही है और इसका अनुमान इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि विशेष कार्य बल ने 28 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र इससे मुक्त कराया है।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ को सूचित किया गया कि विशेष कार्य बल ने करीब 3,202 वर्ग मीटर सड़कों, मार्गो और फुटपाथ को भी अतिक्रमण से मुक्त कराया है। शीर्ष अदालत ने गैरकानूनी निर्माण संबंधी कानूनों पर अमल और अतिक्रमण हटाने के काम की निगरानी के लिये इस साल अप्रैल में यह कार्यबल गठित किया था।

पीठ को बताया गया कि विशेष कार्य बल को अभी तक करीब सात हजार शिकायतें मिलीं हैं जिनमें से करीब 3,400 शिकायतों को देखा गया है और कार्य बल के काम को तेजी से करने के लिये इसमें अतिरिक्त स्टाफ भर्ती करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

JNU में दाखिले में न्यायालय के आदेश का उल्लघंन

पीठ ने कहा, ‘‘रिपोर्ट के अवलोकन से हमें पता चला कि विशेष कार्य बल ने स्थाई संरचनाओं के तहत 10,71,838 वर्ग मीटर अतिक्रमण हटाया है। अस्थाई निर्माण के तहत कार्य बल ने 16,99,858 वर्ग मीटर अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। यह अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण की वजह से दिल्ली के सामने पेश गंभीर समस्या की पुष्टि करता है।’’

पीठ ने कहा कि विशेष कार्य बल के निर्देशों के तहत स्थानीय निकायों द्वारा अतिक्रमण से मुक्त कराई गयी भूमि के संरक्षण की आवश्यकता है।

पीठ ने कहा, ‘‘चूंकि नगर निगमों के आयुक्त इस कार्यबल का हिस्सा हैं, हम चाहेंगे की कार्यबल पूरी गंभीरता से इस मामले को देखें और अनधिकृत अतिक्रमण से मुक्त करायी गयी भूमि की सुरक्षा करे।’’

अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण के बारे में विशेष कार्य बल को मिल रही बड़ी संख्या में शिकायतों के बारे में पीठ ने कहा, ‘‘कार्यबल को 7,000 से अधिक शिकायतें मिली हैं जिससे दिल्ली में अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण की व्यापक समस्या का पता चलता है।’’

इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष तरूण कपूर, जो कार्यबल के भी अध्यक्ष हैं, को न्यायालय के निर्देश के बावजूद शीर्ष अदालत में हर पखवाड़े रिपोर्ट दाखिल नहीं करने के लिये आड़े हाथ लिया। पीठ ने कहा कि हमें उनसे यह बताने की गुजारिश करनी पड़ी है कि क्या हो रहा है।

न्यायालय में मौजूद कपूर ने कहा कि विशेष कार्य बल हर पखवाड़े बैठक कर रहा है और ‘‘मैं स्वीकार करता हूं कि रिपोर्ट दाखिल करने में विलंब हुआ है।’’ पीठ ने उनसे कहा, ‘‘आपने ऐसा क्यों किया? पहले तो आप समस्या से निबट नहीं सके और जब मामला शीर्ष अदालत के समक्ष है तो आप कहते हैं कि आप वही करेंगे जो चाहेंगे। यह क्या है?’’

केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने कहा कि उन्होंने डीडीए के उपाध्यक्ष से कहा है कि हर पखवाड़े न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल की जाये।

पीठ ने कहा, ‘‘यदि आप अपना काम नहीं कर सकते हैं तो हमें बतायें कि मैं अपना काम नहीं कर सकता। हम आपको बदल देंगे। यदि आप इसे करना चाहते हैं तो पूरी गंभीरता से कीजिये। विशेष कार्य बल गठित करने और रिपोर्ट मंगाने का सुझाव अटार्नी जनरल का था। दिल्ली की जनता क्या करेगी? उच्चतम न्यायालय क्या करेगा?’’

नाडकर्णी ने जब यह कहा कि इन शिकायतों के लिये कार्य बल को दूसरे विभागों से स्टाफ लेना पड़ा तो पीठ ने कहा, ‘‘यह हमारी नहीं आपकी समस्या है। ऐसे लाखों बहाने हो सकते हैं।’’

नाडकर्णी ने कहा कि कार्य बल ने शिकायतों के निबटारे के लिये समयबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की है और वे 15 दिन के भीतर या 31 दिसंबर तक अपने आप स्टाफ रखने जा रहे हैं।

इस मामले में न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि कार्य बल ने करीब 28 लाख वर्ग मीटर से अतिक्रमण हटाया है। सबसे अधिक अतिक्रमण पूर्वी दिल्ली क्षेत्र से हटाया गया है।

पीठ ने डीडीए के उपाध्यक्ष को अपनी पखवाड़े की रिपोर्ट 15 और 31 जनवरी को पेश करने का निर्देश देने के साथ ही इस मामले को फरवरी के पहले सप्ताह के लिये सूचीबद्ध कर दिया। शीर्ष अदालत राजधानी में अनधिकृत निर्माणों को सील किये जाने से संरक्षण प्रदान करने संबंधी कानून की वैधता से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रही है।