नई दिल्ली : आज से ठीक 87 साल पहले वर्ष 1931 में देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल जाने वाले वीरों भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव को बेशक अभी तक शहीद का दर्जा नहीं दिया गया हो, लेकिन आजादी के बाद देश पर कुर्बान होने वाले सैनिकों के परिवार वालों के लिए एक अच्छी खबर है। अब जल्द ही देशवासी इंडिया गेट पर उन शहिदों की निशानियों को देखकर उनके देशभक्ती के जज्बे को महसूस कर सकेंगे। क्योंकि ढाई साल बाद सरकार को इसकी याद आ गई है और इसका निर्माण शुरू कर दिया गया है। बता दें कि पंजाब केसरी ने बीते वर्ष सात जनवरी को यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

समाजसेवी हरपाल राणा को आरटीआई के तहत राष्ट्रपति सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार इंडिया गेट के सी हेक्सागन पर बनने वाले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के निर्माण के लिए टेंडर आवंटित की जा चुकी है। इसके साथ ही पूरे इलाके की घेराबंदी कर निर्माण कार्य शुरू भी कर दिया गया है। आरटीआई से मिली सूचना के अनुसार इसका निर्माण इसी साल 15 अगस्त तक पूरा हो जाएगा। इस निर्माण के लिए इंडिया गेट से पीछे (मेजर ध्यानचंद स्टेडियम की तरफ) के हिस्से को ऊंचे-ऊंचे टीन के चादरों से ढक दिया गया है। हालांकि राष्ट्रीय युद्ध संग्रहालय बनाने में अभी भी कई रोड़े हैं। आरटीआई के अनुसार इसके लिए अभी तक डिजाइन का चयन नहीं हो सका है।

बता दें कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद सात अक्टूबर 2015 में केंद्रीय कैबिनेट ने इसके राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और राष्ट्रीय युद्ध संग्रहालय बनाने के लिए 500 करोड़ की लागत को अनुमति दी थी। लेकिन इसके बाद इस पर काम नहीं बढ़ सका था। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार इनके वास्तुकला डिजाइन का चयन करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वास्तुकला प्रतियोगिता आयोजन की गई थी। जिसके परिणाम संभवतः 31 दिसंबर 2016 तक घोषित किया जाना था। लेकिन इसमें भी देरी हुई और निर्माण कार्य टलता रहा।

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