दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कहा कि वह मुख्य सचिव हमला मामले में 30 जनवरी को सुनवाई करेगी। इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आरोपी हैं। केजरीवाल, सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं की ओर से पेश वकील ने अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल से कहा कि उन्हें दिल्ली पुलिस की ओर से दाखिल किये गए आरोप पत्र के साथ संलग्न सभी दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गए हैं।

अदालत ने आप नेताओं के वकील और पुलिस को दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया 30 जनवरी तक पूरी करने के लिये कहा। यह आपराधिक मामला इस वर्ष 19 फरवरी को केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर बैठक के दौरान तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर कथित हमले से संबंधित है।

प्रकाश का हाल ही में दूरसंचार विभाग में अतिरिक्त सचिव के तौर पर तबादला कर दिया गया था। इससे पहले, केजरीवाल और सिसोदिया ने उच्च न्यायालय में निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें दिल्ली पुलिस के अधिकारी की तरफ से अभियोजन की अनुमति संबंधित अदालत के नियमित लोक अभियोजक की जगह दो अन्य वकीलों को दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने इस याचिका पर दिल्ली सरकार, पुलिस और प्रकाश से जवाब मांगा था। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने 22 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा था कि दिल्ली पुलिस आयुक्त को इस मामले का अभियोजन किसी ऐसे अधिकारी को सौंपने दिया जाए जो अतिरिक्त पुलिस आयुक्त रैंक से नीचे का नहीं हो।

प्रकाश ने निचली अदालत को बताया था कि दिल्ली पुलिस ने तीन चर्चित और अनुभवी वकीलों को विशेष लोक अभियोजक के तौर पर नामित किया है और इसमें उनकी भी स्वीकृति ली गई है। उन्होंने कहा था कि गृह विभाग के अधिकारियों की सिफारिशों के बावजूद पुलिस के अनुरोध को दिल्ली के गृह मंत्री ने यह कहकर ठुकरा दिया था कि मामला किसी खास पहलू को उजागर नहीं करता।

इस मामले में 25 अक्टूबर को केजरीवाल, सिसोदिया और आप के नौ अन्य विधायकों को निचली अदालत से जमानत मिल गई थी। दो अन्य आरोपी विधायकों अमानतुल्ला खान और प्रकाश जारवाल को गिरफ्तारी के बाद उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी। उस कथित हमले के बाद दिल्ली सरकार और उसके नौकरशाहों के बीच टकराव ने बड़ा रूप ले लिया था।