BREAKING NEWS

भारत के टीकाकरण कार्यक्रम ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में काफी ताकत दी : PM मोदी ◾BJP ने उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री हरक सिंह को पार्टी से किया निष्कासित, कांग्रेस में हो सकते हैं शामिल◾Covid -19 को लेकर WHO ने किया बड़ा खुलासा - कोरोना वायरस पूरी तरह से समाप्त नहीं होगा◾महाराष्ट्र कोरोना : बीते 24 घंटों में आए 41 हजार से ज्यादा नए मामले, शहर में मिली थोड़ी रहत ◾PM मोदी के नेतृत्व की वजह से 157 करोड़ टीके लगाने वाला पहला देश बना भारत - पूनियां◾ जम्मू-कश्मीर : आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर किया ग्रेनेड से हमला, पुलिसकर्मी और आम नागरिक घायल ◾अमित शाह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर से करेंगे मैराथन दौरा◾ मुंबई 1993 ब्लास्ट के आरोपी सलीम गाजी की कराची में हुई मौत, डॉन छोटा शकील का रहा करीबी ◾राजस्थान सरकार का अलवर सामूहिक दुष्कर्म की जांच CBI को सौंपने का निर्णय, हाई लेवल मीटिंग में लिया गया फैसला◾ उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए आप ने जारी की 150 उम्मीदवारों की सूची, जानें किसे मिला टिकट◾निषाद पार्टी एक बार फिर BJP के साथ मिलकर लड़ेगी चुनाव, जानिए कितनी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी nishad ◾केंद्र के पश्चिम बंगाल की झांकी को बाहर करने के फैसले पर ममता ने जताई नाराज़गी, PM मोदी को लिखा पत्र◾कोरोना के कारण डिजिटल हुई प्रचार की लड़ाई, सभी पार्टियों के ‘वॉर रूम’ में जारी जंग, BJP ने बनाई बढ़त ◾धर्म संसद: गिरफ्तारी के बाद भी खाना नहीं खा रहे यति नरसिंहानंद, केवल 'रस आहार' पर अड़े◾हस्तिनापुर से चुनावी रण में उतरने को तैयार मॉडल अर्चना, आत्मविश्वास से परिपूर्ण, कहा- भयभीत नहीं, आगे बढ़ूंगी ◾केजरीवाल ने उत्पल को अपनी पार्टी में शामिल होने का दिया न्योता, AAP के इस दांव से क्या BJP हो सकती है चित◾समाजवादी पार्टी की उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए 30 उम्मीदवारों की सूची जारी ◾आगामी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने अपराधियों और दंगाइयों को टिकट दिए : CM योगी ◾सिद्धू के साथ जारी सियासी उठापठक के बीच CM चन्नी के भाई बगावत पर उतरे, जानें क्यों खफा हुए मुख्यमंत्री के भाई ◾भाजपा गुजरात से लोगों को बुलाकर अफवाह, झूठ, साजिश और नफरत फैलाने का प्रशिक्षण दे रही है : अखिलेश ◾

दिल्ली विधानसभा का कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कोई अधिकार नहीं है : सुप्रीम कोर्ट

2020 में पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में कथित भूमिका के संबंध में फेसबुक और उसके अधिकारियों से देश की बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) जानकारी मांग सकती है, परंतु सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इस पर जवाब देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। कानून-व्यवस्था से संबंधित मुद्दे और अन्य विषय केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने जोर देकर कहा कि फेसबुक के अधिकारी उन सवालों का जवाब नहीं देना चुन सकते हैं, जो दिल्ली विधानसभा की विधायी शक्तियों के दायरे से बाहर है। शीर्ष अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों की जांच के लिए समिति गठित करने की दिल्ली विधानसभा की शक्तियों को बरकरार रखा, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि समिति अभियोजन एजेंसी की तरह काम नहीं कर सकती।

पीठ ने कहा कि दिल्ली विधानसभा का कानून-व्यवस्था की स्थिति पर कोई अधिकार नहीं है और पुलिस व शांति-सद्भाव समिति दंगों के संबंध में आपराधिक मामलों और सबूतों की प्रकृति की जांच नहीं कर सकती।

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर फेसबुक अधिकारी समिति के सामने पेश होने का फैसला करता है, तो उस अधिकारी को सवालों के जवाब देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और समिति इस कार्रवाई के लिए अधिकारी के खिलाफ सदन के विशेषाधिकार हनन में आगे नहीं बढ़ सकती।

शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यह कहना दिल्ली विधानसभा के विधायी जनादेश के भीतर नहीं है कि फेसबुक को एक आरोपी के रूप में नामित किया जाना चाहिए और दिल्ली दंगों में मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

दिल्ली सरकार की शांति और सद्भाव समिति ने फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और एमडी अजीत मोहन को फरवरी 2020, दिल्ली दंगों के दौरान घृणित सामग्री के प्रसार के लिए फेसबुक के दुरुपयोग पर एक विशेषज्ञ गवाह के रूप में तलब किया था। समिति ने मोहन को दो मौकों पर कथित तौर पर यह कहते हुए सम्मन जारी किया था कि उनकी गैर-मौजूदगी को विशेषाधिकार का हनन माना जाएगा।