नई दिल्ली : देश में जब कोई क्रिकेट में सेंचुरी मार कर आता है, तो उसे करोड़ों रुपए दिए जाते हैं, लेकिन जब कोई दिल्ली पुलिस का जवान, फायर डिपार्टमेंट का जवान या बॉर्डर पर कोई शहीद होता है, तो सिर्फ अखबार के किसी कोने में एक छोटी सी खबर छप कर रह जाती है। आम आदमी पार्टी ने सरकार में आते ही शहीदों के परिवार के लिए एक करोड़ की सम्मान राशि का प्रस्ताव पास किया था, लेकिन केंद्र सरकार पिछले चार साल से इसमें अड़ंगा लगा रही थी।

इसके लिए हमने कोर्ट में लड़ाई लड़ी और अंततः सुप्रीम कोर्ट से शहीदों को सम्मान देने का अधिकार वापस मिला। यह कहना है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का। वह गुरुवार को दिल्ली फायर सर्विस एंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के एक समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मोदी जी से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि शहीदों की शहादत पर राजनीति न करें। इसके साथ ही उन्होंने फायर सर्विसेज विभाग के कर्मचारियों को दुनिया की सबसे बेहतरीन सुरक्षा संयंत्र लाकर देने का वादा भी किया।

अरविंद केजरीवाल का उनका कहना है कि उन्हें बड़ा दुख है कि दिल्ली फायर सर्विस के जो पांच जवान शहीद हुए थे, उनके परिवारों को ढाई साल तक सम्मान राशि के लिए धक्के खाने पड़े। यह सम्मान नहीं हुआ। यह राज्य की सरकार का फर्ज है कि 15 दिन के अंदर उस शहीद के परिवार को सम्मान राशि मिल जानी चाहिए। वर्ष 2015 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के 10 दिन के अंदर सरकार ने शहीदों के परिवार को एक करोड़ रुपये सम्मान राशि का प्रस्ताव पास कर दिया।

उसके कुछ दिन बाद दिल्ली पुलिस के एक कर्मचारी की ड्यूटी पर शहीद होने पर सरकार ने 15 दिन के अंदर उसके परिवार को एक करोड़ रुपए की सम्मान राशि प्रदान भी की। भाजपा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की धूर्तता की वजह से दिल्ली सरकार में ऐसे लगभग 15 से 20 केस रुके हुए थे। सुप्रीम कोर्ट से अधिकार मिलने के बाद, दिल्ली सरकार ने तुरंत सभी शहीदों के सम्मान राशि के चेक उनके घर जाकर उनके परिवार वालों को सुपुर्द किये।