मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) सुनील अरोड़ा ने कहा है कि निर्वाचन आयोग उस नियम पर ‘‘पुनर्विचार’’ कर सकता है, जिसमें ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की गड़बड़ी की शिकायतें झूठी पाए जाने पर मतदाता के खिलाफ मुकदमा चलाने का प्रावधान है। उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘चुनाव खत्म हो चुका है, हम आंतरिक रूप से इस पर चर्चा करेंगे कि क्या इसमें संशोधन या शिथिलता आदि होना चाहिए …हम इस पर पुनर्विचार कर सकते हैं।’’
अरोड़ा दंड प्रावधन से जुड़े एक सवाल पर जवाब दे रहे थे जिसके बारे में कई लोगों का मानना है कि यह अवांछनीय है । कोई वोटर दावा करता है कि ईवीएम या पेपर ट्रेल मशीन में उसका वोट सही से रिकार्ड नहीं हुआ तो उसे निर्वाचन आचार नियम के नियम 49 एमए के तहत टेस्ट वोट डालने की अनुमति मिलती है । लेकिन, अगर वोटर इस गड़बड़ी को साबित करने में नाकाम रहता है तो चुनाव अधिकारी भारतीय दंड संहिता की धारा 177 के तहत शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।
चुनाव आयोग लंबे समय से कहता रहा है कि अगर दंड का प्रावधान नहीं हो तो लोग झूठे दावे कर सकते हैं । अरोड़ा ने कहा कि दंड प्रावधान का इस्तेमाल बहुत बहुत दुर्लभ स्थिति में होता है । उन्होंने कहा कि प्रावधान का मकसद ऐसे लोगों को हतोत्साहित करना है जो इस तरह की शिकायत कर चुनावी प्रक्रिया को बाधित करना चाहते हैं।


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