पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने दिल्ली में उच्च प्रदूषण स्तर के चलते निर्माण गतिविधियों, कोयला और बायोमास पर आधारित उद्योगों और ट्रकों के प्रवेश पर पाबंदी 12 नवंबर तक बढ़ा दी है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त इस एजेंसी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अगुवाई वाले एक कार्यबल की सिफारिश के आधार पर पाबंदी की समय सीमा बढ़ायी है। कार्यबल राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता की समीक्षा करता है।

राजधानी में अभी नहीं मिलेगी प्रदूषण से राहत

कार्यबल ने ईपीसीए से सिफारिश की है, ‘‘देखा गया है कि पीएम 2.5 सांद्रता 300 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से बढ़ रही है। चूंकि ‘गंभीर+’ स्थिति 37 घंटे तक बनी रही। अतएव कार्यबल ने सिफारिश की है कि निर्माण गतिविधियों, कोयला और बायोमास पर आधारित उद्योगों, ट्रकों के प्रवेश पर चल रही पाबंदी 12 नवंबर, 2018 तक बढ़ायी जाए। ’’ पीएम 2.5 वायु में तैरते ऐसे कण हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है।

पहले, निर्माण गतिविधियों और कोयला एवं बायोमास पर आधारित उद्योगों पर शनिवार तक के लिए और भारी वाहनों के प्रवेश पर रविवार तक के लिए रोक लगायी गयी थी।

ईपीसीए ने कार्यबल की सिफारिश मान ली और उसने संबंधित प्रशासन को पाबंदी 12 नवंबर तक बढ़ाने का निर्देश दिया। एजेंसी के एक सदस्य ने कहा, ‘‘ईपीसीए ने निर्माण गतिविधियों, कोयला और बायोमास पर आधारित उद्योगों और ट्रकों के प्रवेश पर पाबंदी 12 नवंबर तक बढ़ाने के लिए संबंधित प्रशासन को पत्र लिखा है।’’