नई दिल्ली : ऑनलाइन फार्मेसी दिल्ली हाईकोर्ट के रोक के आदेश के बाद भी धड़ल्ले से दवाओं की होम डिलीवरी कर रही हैं। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने तुरंत संज्ञान लिया और आदेशों का पालन न होने पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की बेंच ने माना कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता और इस पर तुरंत लगाम लगाने की जरूरत है। हालांकि केंद्र ने इस सुनवाई पर कोर्ट को बताया कि कुछ कमेटियों का गठन किया गया है।

जो इस पर विचार कर रही हैं कि इंटरनेट पर बेची जाने वाली दवाएं लोगों तक ऑनलाइन पहुंचाना कितना सुरक्षित है। इसके लिए अभी 6 महीने का वक्त चाहिए। जिस पर ही इस मामले की अगली सुनवाई 9 मई तय कर दी। डर्मेटोलॉजिस्ट जहीर अहमद की तरफ से लगाई याचिका पर 12 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑनलाइन फार्मेसी पर रोक लगा दी थी। यह रोक तब तक के लिए थी। जब तक केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इसके कुछ नियम तय नहीं कर देंती।

गौरतलब है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे मेट्रो शहरों में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का बहुत बड़ा कारोबार है। ऑनलाइन बिक रही इन दवाओं पर राज्य और केंद्र सरकार का कोई अंकुश नहीं है। यही वजह है कि अक्सर ऑनलाइन बिक रही दवाओं में नियमों को ताक पर रखना आम होता जा रहा है। इन नियमों की अनदेखी पर ही याचिका के माध्यम से बताया गया था कि डॉक्टर के नकली प्रिसक्रिप्शन के माध्यम से ऐसी दवाओं को घर बैठे मंगाया जा सकता है।

इसके अलावा वेरिफाईड डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से भी जो दवाएं मंगाई जा रही हैं, वो एक लेटर हेड को अनगिनत बार इस्तेमाल करके ऑनलाइन फार्मेसी से मंगाई जा सकती हैं। ये आम लोगों की जान से खिलवाड़ करना है। यही नहीं आपराधिक लोग भी इससे फायदा उठा सकते हैं।

याचिका में हवाला दिया गया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 और फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत भी दवाओं की बिक्री ऑनलाइन नहीं की जा सकती। याचिका में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि कुछ वेबसाइट प्रतिबंधित दवाओं की भी सप्लाई कर रही हैं। ऑनलाइन बिक्री के कोई नियम कानून नहीं है। इस वजह से ही हाईकोर्ट ने ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री पर रोक लगा दी थीं।

– इमरान खान