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दिल्ली दंगा: UAPA मामले में JNU छात्र शरजील इमाम को अदालत ने चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा

दिल्ली की एक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र शरजील इमाम को इस साल फरवरी में राष्ट्रीय राजधानी में हुये दंगों के मामले में बुधवार को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। इमाम को सख्त आतंकवाद निरोधक कानून-गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है। इमाम को दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने मंगलवार को गिरफ्तार किया था। इमाम पर संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुये दंगों की 'पूर्व नियोजित साजिश' में कथित रूप से शामिल होने का आरोप है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये इमाम को बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश ने दिल्ली पुलिस के अनुरोध को स्वीकार करते हुये इमाम को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने अदालत से अग्रह किया था कि मामले की साजिश का पता लगाने के लिये हिरासत में लेकर उससे पूछताछ आवश्यक है। मामले के जांचकर्ताओं ने इमाम की पांच दिन की पुलिस हिरासत की मांग की थी।

इस मामले में जिन अन्य लोगों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है उनमें पिंजरा तोड़ की सदस्य एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा देवांगना कलिता और नताशा नरवाल के अलावा जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और गुलफिशा खातून, कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां, जामिया समन्वय ​समिति की सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर, जामिया एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान, आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, कार्यकर्ता खालिद सैफी और पूर्व छात्र नेता उमर खालिद शामिल हैं। उमर खालिद को इस मामले में अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।

पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया था कि उमर और उसके साथियों ने इलाके में लोगों को दंगा भड़काने के लिये उकसाया था और यह 'पूर्व नियोजित साजिश' थी। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के निकट पिछले साल दिसंबर में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध के दौरान हिंसा के एक मामले में इस साल 28 जनवरी को इमाम को गिरफ्तार किया गया था। इमाम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहा है। संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से उसके भड़काऊ भाषणों के सोशल मीडिया में प्रसारित होने के बाद उसके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। 

इमाम को गुवाहाटी पुलिस ने भी असम में यूएपीए के तहत दर्ज एक मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था। गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों एवं विरोधियों के बीच हिंसक झड़प के बाद सांप्रदायिक दंगा शुरू हो गया था, जिसमें 53 लोगों की मौत हो गयी थी जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गये थे।