जवाहर लाल नेहरु विश्विद्यालय शिक्षक संघ (जनुटा) ने आरोप लगाया है कि विश्विद्यालय में दाखिले में उच्चतम न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है और शिक्षकों का दमन किया जा रहा है जिसके खिलाफ वे अपना आन्दोलन तेज करेंगे। शिक्षक संघ ने मंगलवार को अपनी आम सभा में विश्विद्यालय में शिक्षकों को डराने-धमकाने के अलावा वेतन रोकने और मनमाने तरीके से अवकाश न देने तथा उनकी शोध परियोजनाओं को रोकने की घटनाओं के खिलाफ अपना आन्दोलन तेज करने का फैसला किया।

जनुटा के अध्यक्ष अतुल सूद और सचिव आशीष कुमार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया था कि विश्विद्यालय में दाखिले में एक भी सीट खाली न रहे लेकिन विश्विद्यालय ने अदालत में जो दस्तावेज पेश किये हैं उसके अनुसार एमफिल पीएचडी में कुल 98 यानी 13 प्रतिशत सीटें खाली रह गयीं। कुल 723 सीटों में 625 सीटों पर ही दाखिला हुआ जो नियमों तथा अदालत के आदेश का सरासर उल्लंघन है।

शिक्षक संघ का कहना है कि दाखिले में आरक्षण का भी पालन नहीं किया गया और 138 छात्रों को आरक्षण से वंचित रखा गया। उसने कहा कि विश्विद्यालय ने अदालत में यह भी नहीं बताया कि किन कारणों से ये सीटें खाली रह गयी हैं। शिक्षक संघ ने यह भी कहा कि विश्विद्यालय प्रशासन उन शिक्षकों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई कर रहा है जो अन्याय एवं मनमाने तरीके का विरोध करते हैं तथा असहमति दर्ज कराते हैं।

प्रशासन ऐसे शिक्षकों को परेशान करने लगा है और उन्हें डराने-धमकाने भी लगा है। उनकी तनख्वाह रोकी जाने लगी है और अवकाश भी मंजूर नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी शोध परियोजनाओं को भी रोकने लगा है। शिक्षकों ने विश्विद्यालय प्रशासन से शिक्षकों का दमन करने वाले सभी परिपत्रों को वापस लेने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे नही मानी गयीं तो वे अपना आन्दोलन तेत्र करेंगे।