BREAKING NEWS

कोविड-19 से प्रभावित देशों की सूची में स्पेन को पीछे छोड़ भारत बना पांचवां सबसे प्रभावित देश ◾राज्यसभा चुनाव से पहले अपने विधायकों को बचाने में जुटी कांग्रेस, 65 MLA को अलग-अलग रिसॉर्ट में भेजा◾बीते 24 घंटों में महाराष्ट्र में कोविड-19 के 2,739 नये मामले ,संक्रमितों की कुल संख्या 83 हजार के करीब ◾बीते 24 घंटों में दिल्ली में कोरोना के 1320 नए मामले, कुल संक्रमितों का आंकड़ा 27 हजार के पार◾केजरीवाल सरकार ने सर गंगा राम अस्पताल के खिलाफ दर्ज कराई FIR, नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप◾पूर्वी लद्दाख गतिरोध - मोल्डो में खत्म हुई भारत और चीन सेना के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत◾UP : एक साथ 25 जिलों में पढ़ाने वाली फर्जी टीचर हुई गिरफ्तार , साल भर में लगाया 1 करोड़ का चूना◾केजरीवाल सरकार ने दिए निर्देश, कहा- बिना लक्षण वाले कोरोना मरीजों को 24 घंटे के अंदर अस्पताल से दें छुट्टी◾एकता कपूर की मुश्किलें बढ़ी, अश्लीलता फैलाने और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के आरोप में FIR दर्ज◾बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अमित शाह कल करेंगे ऑनलाइन वर्चुअल रैली, सभी तैयारियां पूरी हुई ◾केजरीवाल ने दी निजी अस्पतालों को चेतावनी, कहा- राजनितिक पार्टियों के दम पर मरीजों के इलाज से न करें आनाकानी◾ED ऑफिस तक पहुंचा कोरोना, 5 अधिकारी कोविड-19 से संक्रमित पाए जाने के बाद 48 घंटो के लिए मुख्यालय सील ◾लद्दाख LAC विवाद : भारत-चीन सैन्य अधिकारियों के बीच बैठक जारी◾राहुल गांधी का केंद्र पर वार- लोगों को नकद सहयोग नहीं देकर अर्थव्यवस्था बर्बाद कर रही है सरकार◾वंदे भारत मिशन -3 के तहत अब तक 22000 टिकटों की हो चुकी है बुकिंग◾अमरनाथ यात्रा 21 जुलाई से होगी शुरू,15 दिनों तक जारी रहेगी यात्रा, भक्तों के लिए होगा आरती का लाइव टेलिकास्ट◾World Corona : वैश्विक महामारी से दुनियाभर में हाहाकार, संक्रमितों की संख्या 67 लाख के पार◾CM अमरिंदर सिंह ने केंद्र पर साधा निशाना,कहा- कोरोना संकट के बीच राज्यों को मदद देने में विफल रही है सरकार◾UP में कोरोना संक्रमितों की संख्या में सबसे बड़ा उछाल, पॉजिटिव मामलों का आंकड़ा दस हजार के करीब ◾कोरोना वायरस : देश में महामारी से संक्रमितों का आंकड़ा 2 लाख 36 हजार के पार, अब तक 6642 लोगों की मौत ◾

भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

कोरोना की पुष्टि

इलाज चल रहा है

ठीक हो चुके

मृत लोग

जस्टिस बालकृष्णन बोले- केंद्र सरकार को न्यायाधीश मुरलीधर का तबादला आदेश जारी करते हुए सावधानी बरतनी चाहिए थी

पूर्व प्रधान जस्टिस के. जी. बालकृष्णन (K. G. Balakrishnan)ने कहा है कि सरकार को दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के जस्टिस एस मुरलीधर (S. Muralidhar) को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (Haryana High Court) में तबादला करने का ‘‘आधी रात’’ को आदेश जारी करते हुए ‘‘थोड़ी सावधानी’’ बरतनी चाहिए थी। 

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 26 फरवरी को तबादले का आदेश जारी किया। उसी दिन न्यायमूर्ति मुरलीधर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कथित घृणा भाषण देने के लिए तीन भाजपा नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने में दिल्ली पुलिस की नाकामी को लेकर ‘‘नाराजगी’’ जाहिर की थी। 

सरकार ने कहा कि तबादले का किसी मामले से कुछ लेना-देना नहीं है क्योंकि इस संबंध में उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) कॉलेजियम ने पहले ही सिफारिश कर दी थी और न्यायाधीश ने भी अपनी सहमति दी थी। न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने शुक्रवार को फोन पर कहा कि यह महज संयोग है कि अंतिम तबादले की अधिसूचना उस दिन जारी की गई जब उन्होंने घृणा भाषणों पर आदेश दिया था। 

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं मालूम कि कौन सी तारीख को कॉलेजियम के समक्ष तबादले का मुद्दा आया।’’ पूर्व सीजेआई ने कहा कि न्यायमूर्ति मुरलीधर के तबादले का दिल्ली हिंसा मामले पर सुनवाई करते हुए उनकी टिप्पणियों से कुछ लेना-देना नहीं है। 

न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने कहा, ‘‘जब देश में हालात इतने खराब और मीडिया तथा अन्य लोग सक्रिय हैं तो सरकार को आधी रात को ऐसे तबादले के आदेश जारी करते हुए थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए थी क्योंकि इसका लोगों द्वारा कुछ और मतलब निकाले जाने की संभावना है। लोग इसे अलग तरीके से समझ सकते हैं।’’ 

उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि न्यायमूर्ति मुरलीधर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अगले दिन से ही पद संभालने को कहा गया होगा। न्यायमूर्ति बालकृष्णन ने कहा कि आमतौर पर जब ऐसे तबादले का आदेश दिया जाता है तो पद संभालने का समय सात दिन से कम नहीं दिया जाता ताकि जिस न्यायाधीश का तबादला किया गया है वह नयी तैनाती के लिए अपने आप को तैयार कर सकें। 

एनजीओ ‘द कैम्पेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटैबिलिटी एंड रिफॉर्म्स’ (सीजेएआर) ने बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति मुरलीधर के तबादले की निंदा करते हुए दावा किया कि एक ‘‘ईमानदार और साहसी’’ न्यायिक अधिकारी को सजा देने के लिए यह कदम उठाया गया। 

सरकार की अधिसूचना में कहा गया कि राष्ट्रपति ने भारत के प्रधान न्यायाधीश से परामर्श करने के बाद यह फैसला लिया। इसमें यह नहीं बताया गया कि न्यायमूर्ति मुरलीधर को कब से नयी जिम्मेदारी संभालनी है। केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि न्यायमूर्ति मुरलीधर का तबादला उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश पर किया गया। उन्होंने कहा कि इसमें तय प्रक्रिया का पालन किया गया।