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पुलिस ने अदालत में कहा- वरिष्ठ अधिकारी करते हैं यौन अपराधों के मामलों की निगरानी

पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष कहा है कि यौन अपराधों के मामलों की जांच के लिए जिलों में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जरूरत नहीं है क्योंकि प्राथमिकी दर्ज होने से जांच पूरी होने तक उनकी निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाती है।

एक जनहित याचिका में मांग की थी कि यौन अपराधों के मामलों की जांच के लिए जिलों में एसआईटी का गठन किया जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस ने मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में कहा कि वह यौन अपराधों की गंभीर प्रकृति से पूरी तरह से अवगत है और वह पूरा प्रयास कर रही है कि ऐसे मामलों की जांच कुशल और समयबद्ध तरीके से हो।

इसमें आगे कहा गया है कि विशेष पुलिस आयुक्त के तहत वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति ने गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) दिल्ली सिटिजन फोरम फॉर सिविल राइट्स द्वारा जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और फैसला किया कि प्राथमिकी दर्ज होने के समय से ऐसे मामलों की निगरानी संबंधित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

दिल्ली पुलिस ने अपना हलफनामा उस जनहित याचिका के जवाब में दायर किया था जिसमें यौन अपराधों से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना, मुकदमे की सुनवाई तय सीमा में करने और फॉरेंसिक साइंसेज लेबोरेटरी (एफएसएल) में एक अलग विभाग बनाए जाने करने का अनुरोध किया गया है।