नई दिल्ली : सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का अनुबंध खत्म होने के बाद 60 साल की पॉलिसी को लागू करने की मांग को लेकर 22 हजार से अधिक गेस्ट टीचर्स के धरने प्रदर्शन पर जाने से स्कूली शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। एक तरफ जहां स्कूलों में पहली से आठवीं और नौंवी कक्षा की सामान्य वार्षिक परीक्षा चल रही है तो वहीं दूसरी ओर गेस्ट टीचर्स प्रदर्शन बैठे हैं।

ऐसी स्थिति में स्थाई शिक्षकों पर दबाव और बोझ काफी बढ़ गया है। हालत यह है कि कुछ स्कूलों में मूल्यांकन के लिए उत्तर पुस्तिकाओं की भरमार है। एक शिक्षक को दो शिक्षकों का काम करना पड़ रहा है। वहीं स्कूलों में मूल्यांकन के लिए उत्तर पुस्तिकाओं के भरमार लगने की भी बात सामने आई है।

सूत्रों की माने तो अब एक स्थाई शिक्षक को कम से कम भी 100 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करना पड़ेगा। वहीं इससे वार्षिक परीक्षा के 30 मार्च को घोषित होने वाले परिणाम में देरी होने की संभावना जताई जा रही है। राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ (जीएसटीए) के महासचिव अजयवीर यादव का कहना है कि ऐसी स्थिति में तय शुदा तिथि पर सामान्य वार्षिक परीक्षा के परिणाम घोषित नहीं किया जा सकेगा। उनका कहना है कि स्थाई शिक्षकों के पास समय और मैन पावर सीमित है।

12वें दिन भी जारी रहा प्रदर्शन
60 साल की पॉलिसी की मांग को लेकर हजारों गेस्ट टीचर्स 12वें दिन मंगलवार को भी दिल्ली भाजपा कार्यालय के बाहर धरने प्रदर्शन पर बैठे रहे। गेस्ट टीचर्स ने बताया कि मंगलवार को भी भाजपा नेताओं द्वारा उनके साथ बैठक की गई। इस दौरान उन्हें यही आश्वासन दिया कि 31 अगस्त 2019 तक उनकी सेवा स्थगित कर दी गई है। बैठक में शामिल ऑल इंडिया गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी शोएब राणा का कहना है कि यह सिर्फ मौखिक रूप से कहा जा रहा। अब तक इसका कोई ऑर्डर जारी नहीं किया गया है।

– दिनेश बेदी