नई दिल्ली : एमएससी मेडिकल साइंस और पीएचडी के प्रतिभागियों को मेडिकल कॉलेजों में बतौर शिक्षक नियुक्त न करने के मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के प्रस्ताव का नेशनल एमएससी टीचर्स एसोसिएशन (एनएमएमटीए) पुरजोर विरोध किया है। इस प्रस्ताव के विरोध में सोमवार को एसोसिएशन के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने संसद मार्च तक रैली निकाली और विचार गोष्ठी का आयोजन किया।

उनका कहना है कि उन्होंने पिछले पांच महीने में मंत्रालय से कई बार इस विषय पर गुहार लगाई है, लेकिन अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीधर राव बताते हैं कि 60 के दशक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एमबीबीएस के छात्रों को पहले और दूसरे वर्ष में नॉन क्लीनिकल विषयों को पढ़ाने के लिए एमएससी मेडिकल साइंस के प्रतिभागियों को नियुक्त किया जाना शुरू किया गया।

एमसीआई टीम ने किया निर्माणाधीन मेडिकल कालेज का औचक निरीक्षण

इसके बाद पहले वर्ष के एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री और दूसरे वर्ष के माइक्रोबायोलॉजी और फार्माकोलॉजी विषय पढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों में 70 प्रतिशत डॉक्टरों और 30 प्रतिशत एमएससी मेडिकल के प्रतिभागियों को मौका दिया जाने लगा। लेकिन हाल ही में एमएसीआई ने इसे कम करके 15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। एसोसिएशन के महासचिव अर्जुन मैत्रा बताते हैं कि इन विषयों के एमडी (डॉक्टर) और उनके पढ़ाई का न सिर्फ कॉलेज और शिक्षक, बल्कि पाठ्यक्रम भी एक ही होता है।