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दिल्ली – एन. सी. आर.

अब कश्मीर में लहराएगा तिरंगा

नई दिल्ली : दिल्ली में रह रहे कश्मीरी पंडितों में जो खुशी देखी जा रही है, उसको बयां नहीं किया जा सकता। धारा-370 खत्म होते ही अब कश्मीर में भी तिरंगा लहराएगा। कश्मीरी पंडितों का कहना है कि अब कश्मीर में तिरंगा फहराने की तमन्ना भी पूरी होगी। जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने के बाद सरकार का अगला कदम आतंकवाद की वजह से घाटी छोड़ चुके कश्मीरी पंडितों को घर वापस लाने का होगा। 

सूत्रों के मुताबिक इसकी पूरी योजना तैयार की जा रही है। सरकार जल्द ही कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के पैकेज का ऐलान कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक घाटी छोड़ चुके पंडितों के लिए फ्लैटों का निर्माण किया जाएगा या उन्हें अलग से होमलैंड भी दिए जा सकते हैं। घर वापसी करने वाले विस्थापितों को कारोबार खड़ा करने के लिए भी आर्थिक मदद दी जाएगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 3 लाख से अधिक कश्मीरियों को आतंकवाद की वजह से विस्थापित होना पड़ा है।

विस्थापित पंडितों की कश्मीरी समिति का कहना है कि सरकार का आज का फैसला हमारे लिए काफी अहम है, लेकिन हमारी मांग है कि सरकार हमें अलग से होमलैंड दे। हमारे लिए रोजगार की व्यवस्था की जाए और कारोबार के लिए आर्थिक मदद दी जाए। उन्होंने बताया कि कश्मीरी समिति सरकार के फैसले की समीक्षा करेगी और जल्द ही सरकार के नुमाइंदों से मुलाकात करेगी। उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्हें गृह राज्य मंत्री की तरफ से मिलने का न्योता आया था, लेकिन किसी कारणवश कश्मीरी समिति नहीं जा सकी थी। 

रूट्स इन कश्मीर के सदस्य राहुल महनोरी ने बताया कि वे दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। उनके जैसा हर कश्मीरी वापस अपने घर को जाना चाहता है, लेकिन उन्हें बसने के लिए अलग जगह दी जाए। क्योंकि वे अब अपने पुराने ठिकाने पर नहीं जा सकते। दिल्ली के विस्थापित पंडितों की कश्मीरी समिति के अध्यक्ष समीर कहते हैं जब उन्हें कश्मीर छोड़ना पड़ा था तब वह बीस साल के थे, अब उनकी उम्र 50 साल है। वह कश्मीर में फिर से बसते हैं तो उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी। ऐसे में, सरकार को उनके कारोबार के लिए आर्थिक पैकेज देना चाहिए। 

कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए घाटी के दक्षिणी इलाके अनंतनाग, उत्तरी इलाके बारामुला व कुपवाड़ा में व्यवस्था की जा सकती है। घाटी के पूर्वी व पश्चिमी इलाके से लगे श्रीनगर में भी इनके लिए इंतजाम किए सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2017 में केंद्र व जम्मू-कश्मीर सरकार ने घाटी में आठ स्थानों पर विस्थापितों को बसाने के लिए 100 एकड़ जमीन चिन्हित कर ली थी। दिल्ली में रह रहे कश्मीरियों का कहना है कि 28 साल पहले हमने कश्मीर छोड़ दिया। अब हम उनलोगों के साथ नहीं रह सकते हैं जिनके कारण हमें कश्मीर छोड़ना पड़ा।