दिल्ली के पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की हालिया नियुक्ति के खिलाफ एक याचिका दायर हुई थी, जिस पर शीर्ष अदालत सुनवाई करने को राजी हो गया। दिल्ली पुलिस आयुक्त के तौर पर राकेश अस्थाना की नियुक्ति को बरकरार रखने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा दायर याचिका करते हुए अस्थाना को नोटिस भेजा।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की एक पीठ ने एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (सीपीआईएल) की ओर से दायर याचिका पर केन्द्र और आईपीएस अधिकारी अस्थाना से जवाब भी मांगा।
सेवानिवृत्ति की तारीख 31 जुलाई से चार दिन पहले बने दिल्ली पुलिस आयुक्त
एनजीओ ने आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना की सेवानिवृत्ति की तारीख 31 जुलाई से चार दिन पहले, उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त बनाने के केन्द्र के फैसले के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की। सीपीआईएल की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने पीठ से कहा कि उन्होंने अदालत के 18 नवंबर के निर्देश के अनुसार यह अपील दायर की है। केन्द्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अस्थाना के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि वे दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करेंगे।
फैसला सही, अवैधता या अनियमितता नहीं है
उच्चतम न्यायालय ने 18 नवंबर को एनजीओ को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध अपील दायर करने की अनुमति दी थी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर को अपने फैसले में अस्थाना को दिल्ली का पुलिस आयुक्त नियुक्त करने के केन्द्र के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि उनके चयन मे कोई भी ‘‘अवैधता या अनियमितता नहीं है।’’


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