निर्यातकों के प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने कहा कि बढ़ते संरक्षणवाद, कठिन वैश्विक हालात और प्रतिकूल घरेलू परिस्थितियों के बाद भी फरवरी महीने में देश का निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 26.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया।एफआईईओ के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि वैश्विक व्यापार में नरमी तथा उथल-पुथल भरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के कारण एशिया में विशेषकर चीन और दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों में विनिर्माण में कमी के साथ नरमी के संकेत दिख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि फरवरी महीने के दौरान रत्न एवं आभूषण, चमड़ा एवं चमड़े के उत्पाद, बागवानी, हथकरघा, कालीन, जूट विनिर्माण और समुद्री उत्पाद समेत श्रम केंद्रित निर्यात के सभी क्षेत्रों में कमी दर्ज की गयी। इसके अलावा पेट्रोलियम निर्यात में भी गिरावट आयी है। इनके कारण आलोच्य माह के दौरान कुल निर्यात की वृद्धि संकुचित हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान 30 प्रमुख उत्पाद समूहों में से 18 में मामूली वृद्धि दर्ज की गयी।

हालांकि, इस गति से भी पूरे वित्त वर्ष के दौरान देश का निर्यात 330 अरब डॉलर को पार कर जाएगा जो अभी तक किसी भी वित्त वर्ष के दौरान देश का सर्वाधिक निर्यात होगा। गुप्ता ने कहा कि फरवरी महीने में आयात 5.41 प्रतिशत कम हुआ।

इसका मुख्य कारण पेट्रोलियम उत्पादों, मंहगे पत्थरों और सोना एवं चांदी के आयात में कमी आना है। इनके अलावा परिवहन उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों का भी आयात कम हुआ। इन सबके कारण व्यापार घाटा करीब डेढ़ साल के निचले स्तर पर आ गया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार युद्ध के प्रभावों तथा आपूर्ति में कमी के कारण कच्चा तेल के भाव में तेजी ने भी देश के आयात और निर्यात दोनों को प्रभावित किया है। इसके अलावा अमेरिका द्वारा भारत को जीएसपी से बाहर किये जाने से भी घरेलू निर्यातकों की परेशानियां बढ़ी हैं।