BREAKING NEWS

भाजपा ने किया कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन : किसानों के प्रति असंवेदनशील होने का लगाया आरोप ◾कांग्रेस जवाब दे कि न्यायालय में उसने भगवान राम के अस्तित्व पर क्यों सवाल उठाए : ईरानी◾दिल्ली के रामलीला मैदान में 22 दिसंबर को रैली कर दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार शुरू करेंगे PM मोदी ◾जामिया के छात्रों ने आंदोलन फिलहाल वापस लिया◾सीएए के खिलाफ जनहित याचिका दायर की, एआईएमआईएम हरसंभव तरीके से कानून के खिलाफ लडे़गी : औवेसी◾गंगा बैराज की सीढियों पर अचानक फिसले प्रधानमंत्री मोदी ◾संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ पूर्वोत्तर, बंगाल में प्रदर्शन जारी◾PM मोदी ने कानपुर में वायुसेना कर्मियों के साथ की बातचीत ◾कानपुर : नमामि गंगे की बैठक के बाद PM मोदी ने नाव पर बैठकर गंगा की सफाई का लिया जायजा ◾राहुल गांधी के लिए ‘राहुल जिन्ना’ अधिक उपयुक्त नाम : भाजपा ◾TOP 20 NEWS 14 December : आज की 20 सबसे बड़ी खबरें◾उत्तर प्रदेश : फतेहपुर में दोहराया गया 'उन्नाव कांड', बलात्कार के बाद पीड़िता को जिंदा जलाया ◾साबित हो गया कि मोदी ने झूठे वादे किए थे : मनमोहन सिंह◾जम्मू-कश्मीर : फारुक अब्दुल्ला की हिरासत अवधि 3 महीने और बढ़ी◾झारखंड : अमित शाह बोले- CAB कानून के खिलाफ कांग्रेस भड़का रही है हिंसा◾मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं, कभी माफी नहीं मांगने वाला : राहुल गांधी◾'भारत बचाओ रैली' में बोलीं सोनिया गांधी- भारत की आत्मा को तार-तार कर देगा नागरिकता संशोधन कानून◾संविधान और देश को विभाजन से बचाने के लिए पूरा देश आवाज उठाए: प्रियंका गांधी ◾'भारत बचाओ' रैली से पहले राहुल गांधी का ट्वीट, कहा- BJP सरकार की तानाशाही के खिलाफ बोलूंगा◾पीएम मोदी निर्मल गंगा के दर्शन करने पहुंचे कानपुर, एयरपोर्ट पर CM योगी ने किया स्वागत ◾

दिल्ली – एन. सी. आर.

वायु प्रदूषण को लेकर SC ने कहा-यह दिल्ली-NCR में करोड़ों लोगों की जिंदगी और मौत का सवाल

 sc

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि खतरनाक स्तर का वायु प्रदूषण दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के करोड़ों लोगों के लिए जिंदगी-मौत का सवाल बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण पर अंकुश लगा पाने में विफल रहने के लिए प्राधिकारियों को ही जिम्मेदार ठहराना होगा। 

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्या आप लोगों को प्रदूषण की वजह से इसी तरह मरने देंगे। क्या आप देश को सौ साल पीछे जाने दे सकते हैं?’’ पीठ ने कहा, ‘‘हमें इसके लिए सरकार को जवाबदेह बनाना होगा।’’ 

पीठ ने सवाल किया, ‘‘सरकारी मशीनरी पराली जलाए जाने को रोक क्यों नहीं सकती?’’ न्यायाधीशों ने राज्य सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि यदि उन्हें लोगों की परवाह नहीं है तो उन्हें सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा, ‘‘आप (राज्य) कल्याणकारी सरकार की अवधारणा भूल गए हैं। आप गरीब लोगों के बारे में चिंतित ही नहीं हैं। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।’’ 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या सरकार किसानों से पराली एकत्र करके उसे खरीद नहीं सकती? दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दम घोंटने वाले वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘हम पराली जलाने और प्रदूषण पर नियंत्रण के मामले में देश की लोकतांत्रिक सरकार से और अधिक अपेक्षा करते हैं। यह करोड़ों लोगों की जिंदगी और मौत से जुड़ा सवाल है। 

हमें इसके लिए सरकार को जवाबदेह बनाना होगा। दम घोंटने वाले वायु प्रदूषण में किसानों द्वारा पराली जलाए जाने के योगदान के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्य सचिवों को छह नवंबर को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था। दिल्ली और इससे लगे इलाकों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने मंगलवार को इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए अलग से खुद एक नया मामला दर्ज किया। 

कोर्ट ने कहा था कि ‘आपात स्थिति से बदतर हालात’ में लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसके आदेश के बावजूद निर्माण कार्य एवं तोड़फोड़ की गतिविधियां करने वालों पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाए। पीठ ने कहा था कि इलाके में यदि कोई कूड़ा-करकट जलाते पाया गया तो उस पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाए। इस मामले में अन्य मामले के साथ ही बुधवार को सुनवाई हुयी। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को ‘भयावह’ करार दिया था। साथ ही, क्षेत्र में निर्माण एवं तोड़-फोड़ की सभी गतिविधियों तथा कूड़ा-करकट जलाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 

दिल्ली में RBI कार्यालय के बाहर जमा हुए PMC खाताधारक, मांगा आश्वासन

कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस आदेश का किसी तरह का उल्लंघन होने पर स्थानीय प्रशासन और क्षेत्र के अधिकारी जिम्मेदार ठहराए जाएंगे। पीठ ने कहा था कि वैज्ञानिक आंकड़ों से यह पता चलता है कि क्षेत्र में रहने वालों की आयु इसके चलते घट गई है। कोर्ट ने सवाल उठाया था कि , ‘‘क्या इस वातावरण में हम जीवित रह सकते हैं? ‘‘दिल्ली का हर साल दम घुट रहा है और हम इस मामले में कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। 

सवाल यह है कि हर साल ऐसा हो रहा है। किसी भी सभ्य समाज में ऐसा नहीं हो सकता।’’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ‘‘ दिल्ली में रहने के लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है। यहां तक कि लोग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं है। यह भयावह है।’’