नई दिल्ली: स्कूलों में बच्चों को मिलने वाला मिड-डे मील खाने में कितना सुरक्षित है इसका पता तो तभी चलता है जब उसकी ठीक ढंग से जांच करवाई जाए लेकिन यदि कोई विभाग इसकी जांच करवाने में ही इच्छुक न हो तो फिर बच्चों को जैसा मर्जी खाना परोसा जाए कोई पूछने वाला नहीं है। बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील को लेकर तीनों निगम कितने सतर्क हैं इसे जानने के लिए एक आरटीआई लगाई गई।

पब्लिक प्रोटेक्शन मूवमेंट ऑर्गनाईजेशन के अध्यक्ष जीशान हैदर द्वारा लगाई गई इस आरटीआई के जरिए यह बात सामने आई कि जहां एक तरफ पूर्वी दिल्ली शिक्षा विभाग और उत्तरी दिल्ली शिक्षा विभाग खाने के सैंपल समय-समय पर जांच करवाती रहती है, वहीं दक्षिणी दिल्ली शिक्षा विभाग ने इसकी जांच करवाई है या नहीं इस बात का कोई सबूत ही नहीं है क्योंकि आरटीआई में दक्षिणी दिल्ली शिक्षा विभाग ने जवाब दिया कि उनके पास जांच के आंकड़े संकलित रूप में कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं। अब ऐसे में यदि मिड-डे मील से बच्चों को कुछ होता है विभाग से जानकारी मांगी जाती है तो विभाग के पास दिखाने के लिए कोई आंकड़े ही नहीं होंगे।