विदेश मंत्री सुषमा स्वराज रूस से लौटते वक्त आज तेहरान में रूकीं और दोपहर के भोजन के दौरान आपसी हितों के मुद्दे पर अपने ईरानी समकक्ष जावेद जरीफ से वार्ता की। सुषमा रूस के शहर सोची से लौट रही थीं। वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गयी थीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, अपने पारंपरिक करीबी और सभ्यतागत जुड़वों को मजबूत करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ईरान के विदेश मंत्री डा. जावेद जरीफ के साथ तेहरान में दोपहर के भोजन के दौरान वार्ता की। दोनों पक्षों ने आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा की।

 समझा जाता है कि दोनों मंत्रियों ने चाबहार बंदरगाह परियोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की, जिसमें भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है। एक महीने पहले भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह के जरिए समुद, से अफगानिस्तन को गेहूं की पहली खेप भेजी थी। इसे पाकिस्तान को दरकिनार कर तीनों देशों के बीच महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग के संचालन का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बंदरगाह से भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच व्यापार बढ़ने की उम्मीद है।

पाकिस्तान दोनों देशों के साथ कारोबार के लिए नयी दिल्ली को रास्ता देने से मना कर रहा है। समझा जाता है कि द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा स्वराज और जरीफ ने खाड़ क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिति और राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी बातचीत की। सुषमा पिछले साल अप्रैल में द्विपक्षीय दौरे पर ईरान गयी थीं। इस दौरान दोनों पक्षों ने खासकर तेल और गैस क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रमों में भारतीय निवेश को बढ़वा देने के साथ ही संपूर्ण संबंधों को सुदृढ़ करने का फैसला किया था। सुषमा के वहां रूकने के बारे में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह एक तकनीकी ठहराव था और पहले से कार्यक्रम निर्धारित नहीं था।

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