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गाजीपुर मंडी में मिले IED प्लांट करने की जिम्मेदारी आतंकी संगठन MGH ने ली

गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली के गाजीपुर फूल मंडी को विस्फोटक से उड़ाने की साजिश आतंकी सगंठन मुजाहिद्दीन गजवात हिंद ने रची थी. अल कायदा से जुड़े आतंकी सगंठन मुजाहिद्दीन गजवात हिंद ने रची थी। अल कायदा से जुड़े आतंकी संगठन मुजाहिद्दीन गजवात हिंद ने टेलीग्राम पर यह लेटर भेजकर इस आईईडी हमले की जिम्मेदारी ली है। 

मीड़िया रिपोर्ट के मुताबिक, इस बात की जानकारी मिली है कि गाजीपुर मंडी में लगाए गए बम एक घंटे आठ मिनट पर फटना था। हालांकि, अभी तक ये मालूम नहीं है कि भारत में बमों की कितनी खेप को भेजा गया है। लेकिन पंजाब पुलिस ने ही अकेले 20 आईईडी, 5-6 किलोग्राम का आईडी और 100 ग्रेनेड को जब्त किया है। पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों से कहा गया है कि वे पंजाब के अलावा उत्तर प्रदेश जैसे चुनावी राज्यों और महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे संवेदनशील राज्यों में धमाकों के लिए अधिक आईईडी और टिफिन बम तैयार करें।

सांप्रदायिक दहशत फैलाना है मकसद

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अफगान हेरोइन और अफीम का कारोबार करने वाले सीमा पार के ड्रग तस्करों को ड्रोन और समुद्र में जाने वाले जहाजों के जरिए आईईडी को भारत में पहुंचाने का काम सौंपा गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘ड्रग्स के पैसे से आईईडी की खेप अभी भी भारत में आ रही है, जिसका मकसद एक बड़ी घटना के बाद सांप्रदायिक दहशत फैलाना है। 26/11 का आरोपी और पाकिस्तान मूल के लश्कर-ए-तैयबा आतंकी डेविड कोलमैन हेडली ने एनआईए को खुलासा किया था कि पाकिस्तानी आतंकी हमलों को ड्रग के पैसे का इस्तेमाल करते हैं।

साइकिल बियरिंग और कीलों के साथ रखा गया था विस्फोटक

फैक्ट ये है कि अगर दिल्ली पुलिस की पीसीआर ने गाजीपुर मामले में तत्परता नहीं दिखाई होती, तो विस्फोट में कई बेगुनाह मारे जाते. साथ ही राजधानी में अनिश्चितता का माहौल पैदा हो जाता। विस्फोटक को एक स्टील टिफिन के अंदर साइकिल बियरिंग और कीलों के साथ रखा गया था, जो विस्फोट होने पर घातक छर्रों के रूप में लोगों को शिकार बनाते। बम को इस तरह से डिजाइन किया गया था कि आरडीएक्स अमोनियम नाइट्रेट और ईंधन तेल के साथ एक मुख्य चार्ज बनाता, जो धमाके के लिए एक सेकेंडरी चार्ज के रूप में काम करता।

इंडियन मुजाहिदीन का सिग्नेचर मूव थे टिफिन बम

पिछले एक दशक में, टिफिन बम पाकिस्तान प्रायोजित इंडियन मुजाहिदीन आतंकवादी समूह के सिग्नेचर मूव थे। इनका इस्तेमाल 2005 सरोजिनी नगर और पहाड़गंज बाजार धमाकों में किया गया था। गोरखपुर, लखनऊ, वाराणसी, हल्द्वानी, जयपुर, हैदराबाद और मुंबई में धमाकों में आतंकी संगठन द्वारा इसी डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था। सीमा पार अपने आकाओं के इशारे पर कट्टरपंथी स्थानीय आतंकियों द्वारा किए गए धमाकों में सैकड़ों निर्दोष मारे गए थे।