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आइशी घोष समेत JNU के तीन छात्रों से पूछताछ, छात्रों और शिक्षकों ने कक्षाओं का किया बहिष्कार

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष समेत तीन छात्रों से पांच जनवरी को परिसर में हुई हिंसा के मामले में पूछताछ की, वहीं विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने शुल्क वृद्धि के मुद्दे पर प्रशासन के साथ टकराव के बीच कक्षाओं का बहिष्कार किया। 

जेएनयू के शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एक बार फिर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि परिस्थितियां अकादमिक गतिविधियों के लिहाज से अनुकूल नहीं हैं और छात्रों को परिसर में लौटने में डर लग रहा है। 

जेएनयू छात्र संघ ने सेमिस्टर पंजीकरण का बॉयकॉट जारी रखा है। वे छात्रावास की शुल्क वृद्धि को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावा किया कि करीब 8500 विद्यार्थियों में से 5000 से ज्यादा पंजीकरण करा चुके हैं। 

इस बीच मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने एक बयान में कहा कि जेएनयू छात्रों का विरोध जारी रखना उचित नहीं है क्योंकि शुल्क वृद्धि का मुद्दा सुलझाया जा चुका है। 

परिसर में नकाबपोश लोगों द्वारा छात्रों और शिक्षकों पर हमले के मामले में जांच के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की एक टीम ने जेएनयू का दौरा किया और घोष के साथ ही पंकज मिश्रा तथा वास्कर विजय मेक से पूछताछ की। 

घोष कुल नौ संदिग्धों में से उन सात छात्रों में शामिल हैं जो वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े हैं। दो छात्र आरएसएस से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े हैं। हालांकि मिश्रा ने दावा किया कि वह किसी पक्ष से संबद्ध नहीं हैं। 

घोष ने कहा, ‘‘उन्होंने घटनाक्रम पर मेरा पक्ष जानना चाहा। उन्होंने मुझसे मेरी शिकायत के बारे में पूछा। मैंने भी पूछा कि उन्होंने मेरी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की।’’ 

जेएनयू के प्रोफेसरों की एक याचिका पर जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय को यह भी बताया कि उसने विश्वविद्यालय प्रशासन से हिंसा की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और सौंपने को कहा था लेकिन विश्वविद्यालय की तरफ से कोई जवाब अभी तक नहीं मिला। 

पुलिस ने बताया कि उसने व्हाट्सऐप को भी पत्र लिखकर दोनों समूहों के सदस्यों के संदेश, तस्वीरें, वीडियो और फोन नंबर सुरक्षित रखने को कहा है। 

पुलिस के मुताबिक छात्रों अक्षत अवस्थी और रोहित शाह को भी जांच में शामिल होने को कहा है जो एक समाचार चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में नजर आये थे। एबीवीपी ने दोनों के संगठन से जुड़े होने से इनकार किया है। 

वामपंथी छात्र संगठनों और कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई पर निशाना साधते हुए एबीवीपी ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि पांच जनवरी की हिंसा में वे साथ थे। 

एबीवीपी ने अपने दावों के समर्थन में आठ वीडियो भी जारी किये और विस्तृत जांच की मांग की। 

जेएनयू परिसर में कक्षाएं सोमवार को शुरू होने वाली थीं लेकिन सामूहिक बहिष्कार के कारण शुरू नहीं हो पायीं। 

छात्रों और शिक्षकों ने शुल्क वृद्धि के मुद्दे पर प्रशासन से गतिरोध के बीच कक्षाओं का बहिष्कार किया। वे कुलपति एम जगदीश कुमार को बर्खास्त करने की मांग पर अड़े रहे। 

जेएनयू प्रशासन ने शिक्षकों को छात्रों के हित में कक्षाएं शुरू करने के लिए परामर्श जारी किया है। हालांकि शिक्षकों ने सलाह पर अमल नहीं किया। 

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात में जेएनयू शिक्षक संघ के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शैक्षणिक गतिविधियों के लिए माहौल सही नहीं है। 

जेएनयूटीए के अध्यक्ष डी के लोबियाल ने एचआरडी मंत्रालय के अधिकारियों से कहा, ‘‘ हम परिसर में सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं, वहां का माहौल अकादमिक गतिविधियों के लिए अनुकूल नहीं है। हिंसा के बाद जो विद्यार्थी चले गये, वे लौटने से डर रहे हैं, ऐसे में कैसे हम अध्यापन बहाल करें।’’