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गीता को संपूर्ण विश्व का बनाने के लिए खुद से करनी होगी शुरुआत : भागवत

नई दिल्ली : जियो गीता द्वारा लाल किले पर आयोजित 'गीता प्रेरणा महोत्सव' के दौरान देश-दुनिया से आये साधु-संतों, राजनेताओं एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने गीता के महत्व को रेखांकित करते हुए मानव एवं देश-समाज के लिए उसकी प्रासंगिकता का जिक्र किया। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गीता को जीवन का सार बताते हुए कहा कि इसे संपूर्ण विश्व का बनाने के लिए शुरुआत खुद से करनी होगी। 

गीता के भाव के 130 करोड़ की जनता के माध्यम से इसे घर-घर, गांव-शहर ले जाना होगा। हैदराबाद बलात्कार एवं हत्याकांड के संदर्भ में महिला सम्मान एवं सुरक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मातृशक्ति के प्रति सम्मान की शिक्षा हमें घर से प्रारंभ करनी होगी। क्योंकि ऐसा अपराध करने वालों की भी बहन और माताएं हैं। भागवत ने कहा कि सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है पर सब कुछ उन्हीं पर छोड़ देने से नहीं चलेगा। 

वहीं साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि यह भारत जैसे देश में शोभा नहीं देता कि यह भ्रष्टाचारी व बलात्कारियों का देश कहलाए। अखिल भारतीय इमाम संगठन के मुख्य इमाम डॉ. उमर अहमद इलयासी ने कहा कि ऐसे लोगों को सरेआम फांसी होनी चाहिए। उन्होंने गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किये जाने की भी मांग की। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने साधु-संतों को आगे आने का आह्वान किया। 

उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान और उनका संरक्षण न सिर्फ हमारा कर्तव्य है बल्कि इसे धर्म स्वयं परिभाषित करता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने गीता को वैश्विक धरोहर बताते हुए कहा कि यह हजारों सालों से प्रासंगिक और हर चुनौतियों व समस्याओं का समाधान खुद में समाहित किए हुए है। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे साधु-संतों के बीच गीता पर बोलने का अवसर मिला। उन्होंने गीता के सार को पद्य में प्रस्तुत किया।

भागवत संग जनार्दन द्विवेदी, चर्चाएं तेज 

लाल किले पर आयोजित 'गीता प्रेरणा महोत्सव' 2019 कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सोनिया गांधी के करीबी रहे जनार्दन द्विवेदी भी मौजूद रहे। द्विवेदी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सहित कई भाजपा नेताओं, मंत्रियों और धार्मिक गुरुओं के साथ मंच साझा किया, जिसके राजनीतिक हल्कों में कई मायने निकाले जा रहे हैं। इस घटना के बाद सवाल उठने लगे हैं कि द्विवेदी ने क्या केवल गीता की प्रशंसा की है या वो आरएसएस एवं भाजपा की विचारधारा से भी कोई इत्तेफाक रखते हैं? 

कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ प्रणव मुखर्जी द्वारा संघ की विचारधारा का समर्थन किये जाने के बाद जनार्दन द्विवेदी दूसरे ऐसे कांग्रेसी नेता हैं जिन्होंने संघ प्रमुख के साथ मंच साझा किया। इस प्रकरण के बाद आम लोगों के जहन में भी प्रश्न उठने लगे हैं कि ये कांग्रेसी नेता का गीता प्रेम है या राजनीतिक पार्टी बदलने की उनकी इच्छा। इस कहानी के पीछे की पटकथा क्या है,ये तो आने वाला समय ही बताएगा! 

लेकिन गीता प्रेरणा महोत्सव के दौरान सोनिया गांधी के करीबियों में से एक माने जाने वाले द्विवेदी ने गीता की जमकर प्रशंसा की और इसे अपने जीवन में बड़ा बदलाव का कारण बताया। उन्होंने कहा कि हमारे स्वाधीनता आंदोलन के मूल में भी गीता रही थी। 'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार' इस नारे में भी गीता का भाव छिपा था।