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अनधिकृत कॉलोनियों के बकाया संपत्तिकर माफ

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में अगामी दो माह के अंदर ही विधानसभा के चुनाव होने है। राजनीतिक पार्टियां अभी से अपना दमखम दिखाने लगी हैं तो वहीं सत्ताधारी पार्टी विभिन्न प्रकार का ऐलान कर जनता को लुभाने का काम कर रही है। ताजा ऐलान भाजपा शासित दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने किया है। 

शुक्रवार को दक्षिणी दिल्ली नगर निगम का बजट प्रस्ताव रखते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने ऐलान किया है कि अनधिकृत कॉलोनी वासियों को अबतक के सभी संपत्तिकर माफ कर दिए गए हैं। जिस दिन से उनकी रजिस्ट्री होगी उसके बाद से ही निगम को संपत्तिकर कर चुकाना होगा। निगम की इस घोषणा से करीब 9 लाख लोगों को जहां फायदा होगा। वहीं दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को 1400 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पढ़ेगा। 

वर्ष 2020-21 के बजट प्रस्तावों को पेश करते हुए स्थायी समिति अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से निगम इलाके में 925 अनधिकृत कॉलोनियों के 9 लाख लोगों को लाभ होगा। अनधिकृत कालोनियों में निगम अभी तक कोई अपना फंड का उपयोग नहीं कर पाता था। लेकिन, केंद्र सरकार के फैसले के बाद दिल्ली के 40 लाख लोगों को अनधिकृत कालोनियों के नियमित होने का लाभ मिलेगा। इससे निगम पार्षद भी फंड लगा सकेंगे।

वर्ष 2004 से 2018 तक के कर माफ

स्थायी समिति अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2004 से 2018 तक का बकाया संपत्तिकर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम अनधिकृत कॉलोनियों से नहीं लेगा। लोगों को वर्ष 2019-20 का बकाया संपत्तिकर देना होगा। इसका भुगतान करने के बाद ही लोग इस योजना का लाभ ले सकेंगे।

कॉलोनी नियमित होने से 100 करोड़ की होगी आय

अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कॉलोनियों के नियमित किए जाने के बाद से निगम को प्रत्येक वर्ष करीब 100 करोड़ रुपए की आय होगी। वहीं पार्षद भी इन कॉलोनियों में विकास कार्य करा सकेंगे।

आयुक्त के प्रस्ताव किए खारिज

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के स्थायी समिति अध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने आयुक्त द्वारा संपत्तिकर की दरों में बढ़ोतरी के सभी प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यही नहीं पेशेवर को बढ़ाने से इनकार कर दिया है। हमने विभागों से कहा है कि वह संपत्तिकर बढ़ाने की बजाय वर्तमान में संपत्तिकर न देने वाले लोगों को कर के दायरे में लाया जाए।

कुछ पार्षद केवल हाजिरी लगाने के लिए आते हैं...

बता दें कि ये पहली दफा नहीं जब पार्षद सदन या फिर सत्र की बैठक से नदारद रहते हों। आम तौर पर अधिकतर पार्षद नदारद दिखाई देते हैं। वहीं कुछ पार्षद केवल हाजिरी लगाने के लिए आते हैं। सदन की बैठक के दौरान भी वह उठकर चले जाते हैं। 

कांग्रेस दल के नेता अभिषेक दत्त ने बताया कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में कांग्रेस के कुल 12 पार्षद है। शुक्रवार को हुए सत्र में वह उपस्थित थे। हालांकि उनकी पार्टी से कोई दूसरा पार्षद उपस्थित नहीं था। उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि पार्षदों की अनुपस्थित की सूचना उन्हें पहले से नहीं मिली थी।