किसान आंदोलन के समर्थन में AAP के उपवास को केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने बताया ‘पाखंड’

Summary :

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से उपवास रखने की अपील की। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे पाखंड बताते हुए मुख्यमंत्री पर निशाना साधा।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के समर्थन में आम आदमी पार्टी आज पूरे देश में सामूहिक उपवास कर रही है।  आप विधायक, पार्षद और पदाधिकारी आज सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पार्टी मुख्यालय पर सामूहिक उपवास रखेंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से उपवास रखने की अपील की। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे पाखंड बताते हुए मुख्यमंत्री केजरीवाल पर निशाना साधा।
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा, उपवास पवित्र होता है। आप जहां हैं, वहीं हमारे किसान भाइयों के लिए उपवास कीजिए। प्रभु से उनके संघर्ष की सफलता की प्रार्थना कीजिए। अंत में किसानों की अवश्य जीत होगी। उनके इस ट्वीट पर केंद्रीय मंत्री ने पलटवार किया।


जावड़ेकर ने कहा, अरविंद केजरीवाल जी, ये आपका पाखंड है। आपने पंजाब विधानसभा चुनावों में वादा किया था कि जीतने पर APMC कानून में संशोधन किया जाएगा। नवंबर 2020 में आपने दिल्ली में कृषि कानूनों को अधिसूचित भी किया और आज आप उपवास का ढोंग कर रहे हो। यह कुछ और नही बल्कि पाखंड ही है।  


मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कि तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे आंदोलनकारी किसानों के आह्वान पर वह सोमवार को दिन भर अनशन करेंगे और उन्होंने बीजेपी नीत केंद्र सरकार से ‘‘अहंकार’’ छोड़कर कानूनों को रद्द करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी की खातिर केंद्र सरकार एक विधेयक लाए। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र को जल्द से जल्द किसानों की सभी मांगों को स्वीकार करना चाहिए, जो पिछले दो हफ्ते से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। केजरीवाल ने नाखुशी जताई कि केंद्र सरकार के कुछ नेता और बीजेपी नेता प्रदर्शनकारी किसानों को ‘‘गद्दार और देशद्रोही’’ बता रहे हैं। 
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि इतनी संख्या में पूर्व सैनिक, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और हस्तियां, वकील और व्यवसायी उनका समर्थन कर रहे हैं और उनके साथ प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं तो क्या सभी देशद्रोही हैं?’’ केजरीवाल ने किसानों के प्रदर्शन को ‘‘बदनाम’’ करने की तुलना अन्ना हजारे के आंदोलन से की जिसमें वह शीर्ष नेता थे। 

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