नई दिल्ली : राजधानी में हरियाणा-यूपी की टैक्सियां नहीं दौड़ पाएंगी। दिल्ली में बढ़ती इनकी संख्या और इनसे होने वाले दुर्घटनाओं को देखते हुए दिल्ली सरकार ने नया नियम बनाने का निर्णय लिया है। अनुमान है कि अगले सत्र में इस विषय पर चर्चा भी हो सकती है। इस संबंध में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का कहना है कि दिल्ली सरकार यूपी-हरियाणा की टैक्सियों को लेकर एक नियम बना रही है। नियम बनने के बाद हरियाणा-यूपी की टैक्सियों को दिल्ली में चलाने के लिए अलग से परमिट लेना होगा।

यदि उक्त टैक्सियां दिल्ली का परमिट नहीं लेतीं तो उन्हें जब्त या भारी जुर्माना किया जा सकेगा। बता दें कि दिल्ली में 40 हजार से अधिक टैक्सियां चलती हैं। इसमें ने ज्यादातर हरियाणा-यूपी के नंबर की टैक्सियां हैं। इन टैक्सियों के पास ऑल इंडिया का परमिट होता है। वहीं कुछ गाड़ियां हरियाणा व यूपी के परमिट वाली भी होती हैं जो निजी एप आधारित हैं। एप आधारित होने के कारण यह निर्धारण कर पाना आसान नहीं होता कि यह मूल रूप से दिल्ली से हैं या अन्य राज्य से।

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इसके अलावा मुख्यमंत्री के आदेश से हाई पावर कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी की रिपोर्ट आनी है। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे का काम किया जाएगा। इसी बीच एक अरब 69 करोड़ 58 लाख 95 हजार रुपए के कैपिटल में 11 अरब 75 करोड़ रुपए की कुल राशि 13 अरब 44 करोड़ 58 लाख 95 हजार की सप्लीमेंट्री डिमांड को मंजूरी दी गई।

404 टैक्सी पर की गई कार्रवाई
दिल्ली के परिवहन विभाग की प्रवर्तन शाखा द्वारा 404 टैक्सी पर कार्रवाई की गई इसमें चालक के खिलाफ चालान 404, मालिक के खिलाफ 157 चालान और 171 वाहनों को बंद किया गया।

दौड़ रहीं 18 हजार बसें
दिल्ली में साढ़े 18 हजार से अधिक बसें दौड़ रही हैं। सदन में प्रश्न का उत्तर देते हुए परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि कंप्यूटर अभिलेख के अनुसार एक अगस्त 2018 तक दिल्ली में 18515 बसों के पास वैध परमिट हैं। इन बसों को विभिन्न रूप से दिल्ली में परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

निजी हाथों में जाएगा फिटनेस कार्य…
दिल्ली में ऑटो रिक्शा एवं टैक्सी तथा अन्य वाहनों के फिटनेस के कार्य को जल्द ही प्राइवेट सेंटर को दिया जाएगा। दिल्ली सरकार ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस संबंध में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत का कहना है कि निजी सेंटर को फिटनेस का काम देने का प्रस्ताव विधाराधीन है। ऑटो रिक्शा एवं टैक्सी यूनिट में चालकों की भारी भीड़ को देखते हुए इस कार्य को विकेंद्रीकरण करने का प्रस्ताव बना दिया गया है।